अयोध्याकाण्ड

अध्याय 304: श्रीराम भरत को उत्तर देना आरम्भ करते हैं

5 श्लोक · 304 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम भरत को उत्तर देना आरम्भ करते हैं

तुलसीदास कहते हैं, भरत का स्वभाव वेदों के लिये भी सुगम नहीं; कवि मेरी छोटी बुद्धि की चपलता क्षमा करें। भरत के सच्चे भाव को कहते सुनते कौन सिय राम के चरणों में अनुरक्त न होगा? दयालु और सुजान राम ने सबकी दशा देखी और भक्त के मन की जान ली। नीति और प्रीति के पालक रघुराज देश, काल और समाज देखकर ऐसे वचन बोले जो परिणाम में हितकर और सुनने में अमृत जैसे थे। तात भरत, तुम धर्म की धुरी धारण करने वाले, लोक और वेद के ज्ञाता और प्रेम में प्रवीण हो। कर्म, वचन और मन से निर्मल, तुम्हारे समान तुम ही हो। गुरुजनों के समाज में, ऐसे कुसमय में, छोटे भाई के गुण कैसे कहे जाएँ?

304.1

भरत सुभाउ न सुगम निगमहूँ । लघु मति चापलता कबि छमहूँ ॥
कहत सुनत सति भाउ भरत को । सीय-राम-पद होइ न रत को ॥

bharata subhāu na sugama nigamahūm̐ | laghu mati cāpalatā kabi chamahūm̐ ||
kahata sunata sati bhāu bharata ko | sīya-rāma-pada hoi na rata ko ||

304.2

सुमिरत भरतहि प्रेम राम को । जेहि न सुलभ तेहि सरिस बाम को ॥
देखि दयाल दसा सब ही की । राम सुजान जानि जन जी की ॥

sumirata bharatahi prema rāma ko | jehi na sulabha tehi sarisa bāma ko ||
dekhi dayāla dasā saba hī kī | rāma sujāna jāni jana jī kī ||

304.3

धरम-धुरीन धीर नय-नागर । सत्य सनेह सील सुख-सागर ॥
देस काल लखि समउ समाजू । नीति प्रीति पालक रघुराजू ॥

dharama-dhurīna dhīra naya-nāgara | satya saneha sīla sukha-sāgara ||
desa kāla lakhi samau samājū | nīti prīti pālaka raghurājū ||

304.4

बोले बचन बानि सरबस से । हित परिनाम सुनत ससि-रस से ॥
तात भरत तुम्ह धरम-धुरीना । लोक बेद-बिद प्रेम-प्रबीना ॥

bole bacana bāni sarabasa se | hita parināma sunata sasi-rasa se ||
tāta bharata tumha dharama-dhurīnā | loka beda-bida prema-prabīnā ||

दो॰ 304दोहा

करम बचन मानस बिमल, तुम्ह समान तुम्ह तात ।
गुरु-समाज लघु बन्धु-गुन, कुसमयँ किमि कहि जात ॥

karama bacana mānasa bimala, tumha samāna tumha tāta |
guru-samāja laghu bandhu-guna, kusamayam̐ kimi kahi jāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0