तापस बेष जनक सिय देखी । भयउ पेमु परितोष बिसेखी ॥
पुत्रि पवित्र किये कुल दोऊ । सुजस धवल जग कह सब कोऊ ॥
tāpasa beṣa janaka siya dekhī | bhayau pemu paritoṣa bisekhī ||
putri pavitra kiye kula doū | sujasa dhavala jaga kaha saba koū ||
5 श्लोक · 287 में से 326
जनक बोले, पुत्री, तूने दोनों कुल पवित्र कर दिए; सब कहते हैं कि तेरा उज्ज्वल यश जगत में फैल गया। तेरी कीर्ति की नदी गंगा को जीतकर करोड़ों ब्रह्माण्डों में बह चली है; गंगा के तो धरती पर तीन ही बड़े स्थान हैं, पर इसने साधुओं के अनगिनत समाज बना दिए। पिता के सच्चे और स्नेह भरे वचन सुनकर सीता मानो संकोच में समा गईं। सीता मन में सकुचाकर कहती नहीं कि यहाँ रात बिताना उचित नहीं। उनका रुख देखकर रानी ने राजा को जताया, और राजा मन ही मन उनके शील स्वभाव को सराहने लगे। बार बार मिल भेंटकर सम्मान से सीता को विदा किया, फिर चतुर रानी ने समय देखकर भरत की दशा कही।
तापस बेष जनक सिय देखी । भयउ पेमु परितोष बिसेखी ॥
पुत्रि पवित्र किये कुल दोऊ । सुजस धवल जग कह सब कोऊ ॥
tāpasa beṣa janaka siya dekhī | bhayau pemu paritoṣa bisekhī ||
putri pavitra kiye kula doū | sujasa dhavala jaga kaha saba koū ||
जिति सुरसरि कीरति-सरि तोरी । गवन कीन्ह बिधि अंड करोरी ॥
गंग अवनि थल तीनि बड़ेरे । एहिं किए साधु समाज घनेरे ॥
jiti surasari kīrati-sari torī | gavana kīnha bidhi aṃḍa karorī ||
gaṃga avani thala tīni bar̤ere | ehiṃ kie sādhu samāja ghanere ||
पितु कह सत्य सनेहँ सुबानी । सीय सकुच महँ मनहुँ समानी ॥
पुनि पितु मातु लीन्हि उर लाई । सिख आसिष हित दीन्हि सुहाई ॥
pitu kaha satya saneham̐ subānī | sīya sakuca maham̐ manahum̐ samānī ||
puni pitu mātu līnhi ura lāī | sikha āsiṣa hita dīnhi suhāī ||
कहति न सीय सकुचि मन माहीँ । इहाँ बसब रजनीं भल नाहीॅं ॥
लखि रुख रानि जनायउ राऊ । हृदयँ सराहत सील सुभाऊ ॥
kahati na sīya sakuci mana māhīm̐ | ihām̐ basaba rajanīṃ bhala nāhīॅṃ ||
lakhi rukha rāni janāyau rāū | hṛdayam̐ sarāhata sīla subhāū ||
बार बार मिलि भेँट सिय, बिदा कीन्हि सनमानि ।
कही समय सिर भरत-गति, रानि सुबानि सयानि ॥
bāra bāra mili bhem̐ṭa siya, bidā kīnhi sanamāni |
kahī samaya sira bharata-gati, rāni subāni sayāni ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0