अयोध्याकाण्ड

अध्याय 273: अयोध्या की श्रीराम के लौटने की प्रार्थना

5 श्लोक · 273 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

अयोध्या की श्रीराम के लौटने की प्रार्थना

कुटिल कैकेयी ग्लानि में गल रही है, पर किसे दोष दे। पुरवासी यह जानकर प्रसन्न हैं कि अभी चार दिन और रुकना है। प्रातः सब स्नान करके गणेश, गौरी, त्रिपुरारि शिव और सूर्य को पूजते हैं, फिर लक्ष्मीपति के चरणों में अंजलि और आँचल फैलाकर विनती करते हैं: श्रीराम राजा हों, जानकी रानी, अवध आनन्द की सीमा बने, वे समाज सहित लौटकर बसें और भरत को युवराज बनाएँ। इस अमृत से सबको सींचकर हे देव, जगत को जीवन का लाभ दो। दोहे में सबकी एक ही माँग है: गुरु, समाज और भाइयों सहित नगर में रामराज्य हो, और राम के राजा रहते हम अवध में ही प्राण छोड़ें।

273.1

गरइ गलानि कुटिल कैकेई । काहि कहइ केहि दूषन देई ॥
अस मन आनि मुदित नर-नारी । भयउ बहोरि रहब दिन चारी ॥

garai galāni kuṭila kaikeī | kāhi kahai kehi dūṣana deī ||
asa mana āni mudita nara-nārī | bhayau bahori rahaba dina cārī ||

273.2

एहि प्रकार गत बासर सोऊ । प्रात नहान लाग सब कोऊ ॥
करि मज्जन पूजहिँ नर-नारी । गनप गौरि तिपुरारि तमारी ॥

ehi prakāra gata bāsara soū | prāta nahāna lāga saba koū ||
kari majjana pūjahim̐ nara-nārī | ganapa gauri tipurāri tamārī ||

273.3

रमा-रमन पद बन्दि बहोरी । बिनवहिँ अंजुलि अंचल जोरी ॥
राजा राम जानकी रानी । आनन्द-अवधि अवध रजधानी ॥

ramā-ramana pada bandi bahorī | binavahim̐ aṃjuli aṃcala jorī ||
rājā rāma jānakī rānī | ānanda-avadhi avadha rajadhānī ||

273.4

सुबस बसउ फिरि सहित समाजा । भरतहि राम करहु जुबराजा ॥
एहि सुख-सुधाँ सींची सब काहू । देव देहु जग-जीवन लाहू ॥

subasa basau phiri sahita samājā | bharatahi rāma karahu jubarājā ||
ehi sukha-sudhām̐ sīṃcī saba kāhū | deva dehu jaga-jīvana lāhū ||

दो॰ 273दोहा

गुरु समाज भाइन्ह सहित, राम राज पुर होउ ।
अछत राम राजा अवध, मरिअ माँग सब कोउ ॥

guru samāja bhāinha sahita, rāma rāja pura hou |
achata rāma rājā avadha, maria mām̐ga saba kou ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0