कहउँ कहावौं का अब स्वामी । कृपा-अम्बुनिधि अन्तरजामी ॥
गुरु-प्रसन्न साहिब अनुकूला । मिटी मलिन मन कलपित सूला ॥
kahaum̐ kahāvauṃ kā aba svāmī | kṛpā-ambunidhi antarajāmī ||
guru-prasanna sāhiba anukūlā | miṭī malina mana kalapita sūlā ||
5 श्लोक · 267 में से 326
स्वामी, अब मैं क्या कहूँ और क्या कहलाऊँ? आप कृपा के सागर और अंतर्यामी हैं। गुरु प्रसन्न हैं, स्वामी अनुकूल हैं, मलिन मन का कल्पित शूल मिट गया। मैं व्यर्थ के डर से डरा, मेरा सोच निर्मूल था। विधाता का दोष नहीं, मैं ही दिशा भूल गया था। मेरा अभाग्य, माता की कुटिलता, विधाता की टेढ़ी चाल और काल की कठिनाई, सबने मिलकर मुझे मारा। पर शरणागत के रक्षक ने अपना प्रण निभाया। देव, आपका स्वभाव कल्पवृक्ष जैसा है, आप कभी किसी के सम्मुख या विमुख नहीं। जो पास जाकर उस वृक्ष को पहचान ले, उसकी छाया सब सोच मिटा देती है, राजा हो या रंक, भला हो या बुरा, सब मनचाहा पाते हैं।
कहउँ कहावौं का अब स्वामी । कृपा-अम्बुनिधि अन्तरजामी ॥
गुरु-प्रसन्न साहिब अनुकूला । मिटी मलिन मन कलपित सूला ॥
kahaum̐ kahāvauṃ kā aba svāmī | kṛpā-ambunidhi antarajāmī ||
guru-prasanna sāhiba anukūlā | miṭī malina mana kalapita sūlā ||
अपडर डरेउँ न सोच समूलें । रबिहि न दोस देव दिसि भूलें ॥
मोर अभाग मातु कुटिलाई । बिधि-गति-विषम काल-कठिनाई ॥
apaḍara ḍareum̐ na soca samūleṃ | rabihi na dosa deva disi bhūleṃ ||
mora abhāga mātu kuṭilāī | bidhi-gati-viṣama kāla-kaṭhināī ||
पाउँ रोपि सब मिलि मोहि घाला । प्रनतपाल पन आपन पाला ॥
यह नइ रीति न राउरि होई । लोकहु बेद बिदित नहिँ गोई ॥
pāum̐ ropi saba mili mohi ghālā | pranatapāla pana āpana pālā ||
yaha nai rīti na rāuri hoī | lokahu beda bidita nahim̐ goī ||
जग अनभल भल एक गोसाँई । कहिय होइ भल कासु भलाईं ॥
देव देवतरु सरिस सुभाऊ । सनमुख बिमुख न काहुहि काऊ ॥
jaga anabhala bhala eka gosām̐ī | kahiya hoi bhala kāsu bhalāīṃ ||
deva devataru sarisa subhāū | sanamukha bimukha na kāhuhi kāū ||
जाइ निकट पहिचानि तरु, छाहँ समनि सब सोच ।
मागत अभिमत पाव जग, राउ रंकु भल पोच ॥
jāi nikaṭa pahicāni taru, chāham̐ samani saba soca |
māgata abhimata pāva jaga, rāu raṃku bhala poca ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0