अयोध्याकाण्ड

अध्याय 260: भरत बचपन से राम की कृपा याद करते हैं

5 श्लोक · 260 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत बचपन से राम की कृपा याद करते हैं

मुनि के वचन सुनकर और राम का रुख पाकर भरत गुरु और स्वामी को पूरी तरह अनुकूल पाते हैं। फिर पुलकित शरीर से सभा में खड़े होते हैं, कमल नेत्रों में प्रेम के आँसू उमड़ आते हैं। मुनिनाथ ने मेरा कहना निबाह दिया, इससे अधिक मैं क्या कहूँ? मैं अपने स्वामी का स्वभाव जानता हूँ, वे अपराधी पर भी कभी क्रोध नहीं करते। खेल में भी मैंने उन्हें कभी रूठे नहीं देखा। बचपन से उन्होंने साथ नहीं छोड़ा, कभी मेरा मन नहीं तोड़ा। खेल में हारने पर भी वे मुझे जिता देते थे। स्नेह और संकोच से मैंने कभी सामने बात नहीं की, आज तक मेरे प्रेम के प्यासे नेत्र दर्शन से तृप्त नहीं हुए।

260.1

सुनि मुनि बचन राम रूख पाई । गुरु साहिब अनुकूल अघाई ॥
लखि अपने सिर सब छरु भारू । कहि न सकहिँ कछु करहिँ बिचारू ॥

suni muni bacana rāma rūkha pāī | guru sāhiba anukūla aghāī ||
lakhi apane sira saba charu bhārū | kahi na sakahim̐ kachu karahim̐ bicārū ||

260.2

पुलकि सरीर सभाँ भये ठाढें । नीरज-नयन नेह-जल बाढ़ें ॥
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा । एहि तें अधिक कहउँ मैं काहा ॥

pulaki sarīra sabhām̐ bhaye ṭhāḍheṃ | nīraja-nayana neha-jala bār̤heṃ ||
kahaba mora muninātha nibāhā | ehi teṃ adhika kahaum̐ maiṃ kāhā ||

260.3

मैं जानउँ निज-नाथ सुभाऊ । अपराधिहु पर कोह न काऊ ॥
मो पर कृपा सनेह बिसेखी । खेलत खुनिस न कबहूँ देखी ॥

maiṃ jānaum̐ nija-nātha subhāū | aparādhihu para koha na kāū ||
mo para kṛpā saneha bisekhī | khelata khunisa na kabahūm̐ dekhī ||

260.4

सिसुपन तेम परिहरेउँ न संगू । कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू ॥
मैं प्रभु कृपा-रीति जियँ जोही । हारेहू खेल जितावहिं मोही ॥

sisupana tema parihareum̐ na saṃgū | kabahum̐ na kīnha mora mana bhaṃgū ||
maiṃ prabhu kṛpā-rīti jiyam̐ johī | hārehū khela jitāvahiṃ mohī ||

दो॰ 260दोहा

महूँ सनेह-सकोच-बस, सनमुख कहे न बैन ।
दरसन तृपित न आजु लगि, पेम पिआसे नयन ॥

mahūm̐ saneha-sakoca-basa, sanamukha kahe na baina |
darasana tṛpita na āju lagi, pema piāse nayana ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0