बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा । नीच बीच जननी मिस पारा ॥
यहउ कहत मोहि आजु न सोभा । अपनीं समुझि साधु सुचि को भा ॥
bidhi na sakeu sahi mora dulārā | nīca bīca jananī misa pārā ||
yahau kahata mohi āju na sobhā | apanīṃ samujhi sādhu suci ko bhā ||
5 श्लोक · 261 में से 326
भरत कहते हैं, विधाता मेरा लाड़ न सह सका, उसने माता के बहाने बीच में अंतर डाल दिया। माता नीच है और मैं साधु और सुचाली हूँ, ऐसा मन में लाना ही करोड़ों कुचालें हैं। क्या कोदो की बाली में अच्छा धान फलता है, या काली घोंघी मोती जनती है? सपने में भी किसी का दोष नहीं, मेरा अभाग्य अथाह समुद्र है। अपने पापों का परिणाम समझे बिना मैंने माता को कटु वचन कहकर व्यर्थ जलाया। एक ही भरोसा है कि गुरु गोसाईं हैं और स्वामी सीता राम हैं। साधुसभा में गुरु और प्रभु के सामने सच्चा भाव कहता हूँ, यह प्रेम है या प्रपंच, झूठ है या सच, मुनि और रघुराज जानते हैं।
बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा । नीच बीच जननी मिस पारा ॥
यहउ कहत मोहि आजु न सोभा । अपनीं समुझि साधु सुचि को भा ॥
bidhi na sakeu sahi mora dulārā | nīca bīca jananī misa pārā ||
yahau kahata mohi āju na sobhā | apanīṃ samujhi sādhu suci ko bhā ||
मातु मन्द मैं साधु सुचाली । उर अस आनत कोटि कुचाली ॥
फरइ कि कोदव बालि सुसाली । मुकुता-प्रसव कि सम्बुक काली ॥
mātu manda maiṃ sādhu sucālī | ura asa ānata koṭi kucālī ||
pharai ki kodava bāli susālī | mukutā-prasava ki sambuka kālī ||
सपनेहुँ दोस कलेस न काहू । मोर अभाग उदधि अवगाहू ॥
बिनु समुझें निज अघ परिपाकू । जारिउँ जायँ जननि कहि काकू ॥
sapanehum̐ dosa kalesa na kāhū | mora abhāga udadhi avagāhū ||
binu samujheṃ nija agha paripākū | jārium̐ jāyam̐ janani kahi kākū ||
हृदयँ हेरि हारेउं सब ओरा । एकहि भाँति भलेहिं भल मोरा ॥
गुरु-गोसाइँ साहिब सिय रामू । लागत मोहि नीक परिनामू ॥
hṛdayam̐ heri hāreuṃ saba orā | ekahi bhām̐ti bhalehiṃ bhala morā ||
guru-gosāim̐ sāhiba siya rāmū | lāgata mohi nīka parināmū ||
साधु सभा गुरु प्रभु निकट, कहउँ सुथल सति भाउ ।
प्रेम प्रपंचु कि झूठ फुर, जानहिँ मुनि रघुराउ ॥
sādhu sabhā guru prabhu nikaṭa, kahaum̐ suthala sati bhāu |
prema prapaṃcu ki jhūṭha phura, jānahim̐ muni raghurāu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0