सब कह सुखद राम-अभिषेकू । मगंल-मोद-मूल मग एकू ॥
केहि बिधि अवध चलहिं रघुराऊ । कहहु समुझि सोइ करिअ उपाऊ ॥
saba kaha sukhada rāma-abhiṣekū | magaṃla-moda-mūla maga ekū ||
kehi bidhi avadha calahiṃ raghurāū | kahahu samujhi soi karia upāū ||
5 श्लोक · 255 में से 326
मुनि कहते हैं, सब मानते हैं कि राम का अभिषेक सुख देने वाला है और मंगल और आनंद की एक ही जड़ है। रघुराज अवध कैसे चलें, समझकर कहो, वही उपाय किया जाए। मुनिवर की वाणी सब आदर से सुनते हैं, पर किसी से उत्तर नहीं बनता। तब भरत सिर नवाकर हाथ जोड़ते हैं। सूर्यवंश में बहुत से राजा हुए, एक से एक बड़े। जगत जानता है कि आपका आशीर्वाद दुख मिटाकर सब कल्याण सजाता है। स्वामी, आप वही हैं जिन्होंने विधाता की गति रोकी, आपकी ठानी टेक को कौन टाल सकता है? अब आप मुझसे उपाय पूछते हैं, यह मेरा अभाग्य है। स्नेह और भय भरे वचन सुनकर गुरु के हृदय में अनुराग उमड़ आता है।
सब कह सुखद राम-अभिषेकू । मगंल-मोद-मूल मग एकू ॥
केहि बिधि अवध चलहिं रघुराऊ । कहहु समुझि सोइ करिअ उपाऊ ॥
saba kaha sukhada rāma-abhiṣekū | magaṃla-moda-mūla maga ekū ||
kehi bidhi avadha calahiṃ raghurāū | kahahu samujhi soi karia upāū ||
सब सादर सुनि मुनिबर बानी । नय-परमारथ-स्वारथ सानी ॥
उत्तर न आव लोग भये भोरे । तब सिर नाइ भरत कर जोरे ॥
saba sādara suni munibara bānī | naya-paramāratha-svāratha sānī ||
uttara na āva loga bhaye bhore | taba sira nāi bharata kara jore ||
मानु-बंस भये भूप घनेरे । अधिक एक तें एक बड़ेरे ॥
जनम हेतु सब कहं पितु-माता । करम सुभासुभ देइ बिधाता ॥
mānu-baṃsa bhaye bhūpa ghanere | adhika eka teṃ eka bar̤ere ||
janama hetu saba kahaṃ pitu-mātā | karama subhāsubha dei bidhātā ||
दलि दुख सजइ सकल कल्याना । असि असीस राउरि जग जाना ॥
सो गोसाइँ बिधि-गति जेहिं छेंकी । सकइ को टारि टेक जो टेकी ॥
dali dukha sajai sakala kalyānā | asi asīsa rāuri jaga jānā ||
so gosāim̐ bidhi-gati jehiṃ cheṃkī | sakai ko ṭāri ṭeka jo ṭekī ||
बूझिअ मोहि उपाउ अब, सो सब मोर अभाग ।
सुनि सनेह-भय बचन गुर, उर उमगा अनुरागु ॥
būjhia mohi upāu aba, so saba mora abhāga |
suni saneha-bhaya bacana gura, ura umagā anurāgu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0