तात बात फुरि राम कृपाहीं । राम बिमुख सिधि सपनेहुँ नाहीं ॥
सकुचउँ तात कहत एक बाता । अरध तजहिं बुध सरबस जाता ॥
tāta bāta phuri rāma kṛpāhīṃ | rāma bimukha sidhi sapanehum̐ nāhīṃ ||
sakucaum̐ tāta kahata eka bātā | aradha tajahiṃ budha sarabasa jātā ||
5 श्लोक · 256 में से 326
गुरु कहते हैं, तात, सब राम की कृपा से होता है। तात, एक बात कहने में सकुचाता हूँ। जब सब कुछ जाता हो तो बुद्धिमान आधा छोड़ देते हैं। तुम दोनों भाई वन जाओ और लक्ष्मण, सीता और रघुराई लौटाए जाएँ। ये सुंदर वचन सुनकर दोनों भाई हर्षित होते हैं, मानो राजा जी उठे हों और राम राजा हो गए हों। लोगों को बहुत लाभ और थोड़ी हानि दिखती है, रानियों को दुख सुख बराबर है, सब रोती हैं। भरत कहते हैं, मुनि ने जो कहा वही करने से जग में जीवन का मनचाहा फल मिलेगा। मैं जन्म भर वन में रहूँगा, इससे बढ़कर मेरा सुख नहीं। नाथ, यदि सच कहते हैं तो वचन प्रमाण कीजिए।
तात बात फुरि राम कृपाहीं । राम बिमुख सिधि सपनेहुँ नाहीं ॥
सकुचउँ तात कहत एक बाता । अरध तजहिं बुध सरबस जाता ॥
tāta bāta phuri rāma kṛpāhīṃ | rāma bimukha sidhi sapanehum̐ nāhīṃ ||
sakucaum̐ tāta kahata eka bātā | aradha tajahiṃ budha sarabasa jātā ||
तुम्ह कानन गवनहु होउ भाई । फेरिअहिं लखन-सीय-रघुराई ॥
सुनि सुबचन हरषे दोउ भ्राता । भे प्रमोद परिपूरन गाता ॥
tumha kānana gavanahu hou bhāī | pheriahiṃ lakhana-sīya-raghurāī ||
suni subacana haraṣe dou bhrātā | bhe pramoda paripūrana gātā ||
मन प्रसन्न तनु तेज बिराजा । जनु जिय राउ राम भये राजा ॥
बहुत लाभ लोगन्ह लघु हानी । सम दुख सुख सब रोवहिँ रानी ॥
mana prasanna tanu teja birājā | janu jiya rāu rāma bhaye rājā ||
bahuta lābha loganha laghu hānī | sama dukha sukha saba rovahim̐ rānī ||
कहहिं भरत मुनि कहा सो कीन्हे । फल जग जीवन्ह अभिमत दीन्हे ॥
कानन करउँ जनम भरि बासू । एहिं तें अधिक न मोर सुपासू ॥
kahahiṃ bharata muni kahā so kīnhe | phala jaga jīvanha abhimata dīnhe ||
kānana karaum̐ janama bhari bāsū | ehiṃ teṃ adhika na mora supāsū ||
अन्तरजामी राम-सिय, तुम्ह सर्बज्ञ-सुजान ।
जो फुर कहहु त नाथ निज, कीजिय बचन प्रवान ॥
antarajāmī rāma-siya, tumha sarbajña-sujāna |
jo phura kahahu ta nātha nija, kījiya bacana pravāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0