राम बचन सुनि सभय समाजू । जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू ॥
सुनि गुरु गिरा सुमगंल-मूला । भयउ मनहुँ मारुत अनुकूला ॥
rāma bacana suni sabhaya samājū | janu jalanidhi mahum̐ bikala jahājū ||
suni guru girā sumagaṃla-mūlā | bhayau manahum̐ māruta anukūlā ||
5 श्लोक · 249 में से 326
राम के वचन सुनकर समाज ऐसा भयभीत हुआ था मानो समुद्र में जहाज़ डगमगा रहा हो। गुरु की मंगलमय वाणी सुनकर मानो अनुकूल हवा चल पड़ी। अब लोग तीनों समय उस पावन नदी में नहाते हैं जिसके दर्शन से ही पापों के समूह नष्ट होते हैं। मंगलमूर्ति राम को आँखें भर भरकर देखते हैं और दण्डवत करते हैं। वे राम के पर्वत और वन देखने जाते हैं, जहाँ सब सुख हैं और कोई दुख नहीं। झरने अमृत जैसा जल बहाते हैं और शीतल, मंद, सुगंधित वायु तीनों तापों को हरती है। अनगिनत जाति के वृक्ष, बेलें और घास तरह तरह के फल, फूल और पत्तों से भरे हैं। तालाबों में कमल हैं, पक्षी कूजते हैं, भौंरे गूँजते हैं, और रंग बिरंगे मृग और पक्षी वैर छोड़कर विचरते हैं।
राम बचन सुनि सभय समाजू । जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू ॥
सुनि गुरु गिरा सुमगंल-मूला । भयउ मनहुँ मारुत अनुकूला ॥
rāma bacana suni sabhaya samājū | janu jalanidhi mahum̐ bikala jahājū ||
suni guru girā sumagaṃla-mūlā | bhayau manahum̐ māruta anukūlā ||
पावन पयँ तिहुँ काल नहाहीं । जो बिलोकि अंघ-ओघ नसाहीं ॥
मगंल-मूरति लोचन भरि भरि । निरखहिं हरषि दंडवत करि करि ॥
pāvana payam̐ tihum̐ kāla nahāhīṃ | jo biloki aṃgha-ogha nasāhīṃ ||
magaṃla-mūrati locana bhari bhari | nirakhahiṃ haraṣi daṃḍavata kari kari ||
राम-सैल-बन देखन जाहीं । जहँ सुख सकल सकल दुख नाहीं ॥
झरना झरहिं सुधा सम बारी । त्रिबिधि ताप हर त्रिबिधि बयारी ॥
rāma-saila-bana dekhana jāhīṃ | jaham̐ sukha sakala sakala dukha nāhīṃ ||
jharanā jharahiṃ sudhā sama bārī | tribidhi tāpa hara tribidhi bayārī ||
बिटप बेलि तृन अगनित जाती । फल प्रसून पल्लव बहु भाँती ॥
सुन्दर सिला सुखद तरु छाहीं । जाइ बरनि बन छबि केहि पाहीं ॥
biṭapa beli tṛna aganita jātī | phala prasūna pallava bahu bhām̐tī ||
sundara silā sukhada taru chāhīṃ | jāi barani bana chabi kehi pāhīṃ ||
सरनि-सरोरुह जल बिहग, कूजत गुञ्जत भृङ्ग ।
बैर-बिगत बिहरत बिपिन, मृग बिहँग बहुरंग ॥
sarani-saroruha jala bihaga, kūjata guñjata bhṛṅga |
baira-bigata biharata bipina, mṛga biham̐ga bahuraṃga ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0