सीय आइ मुनिबर पग लागी । उचित असीस लही मन मागी ॥
गुरु-पतिनिहि मुनि-तियन्ह समेता । मिली प्रेम कहि जाइ न जेता ॥
sīya āi munibara paga lāgī | ucita asīsa lahī mana māgī ||
guru-patinihi muni-tiyanha sametā | milī prema kahi jāi na jetā ||
5 श्लोक · 246 में से 326
सीता आकर मुनिवर के चरण छूती हैं और मनचाहा उचित आशीर्वाद पाती हैं। गुरुपत्नी और मुनियों की स्त्रियों से वे ऐसे प्रेम से मिलती हैं जो कहा नहीं जा सकता। जब सब सासुएँ सीता को देखती हैं, तो सहमकर आँखें मूँद लेती हैं, मानो हंसिनियाँ बहेलिए के वश में पड़ गई हों। कुचाली विधाता ने यह क्या किया? सीता को देखकर उन्हें बड़ा दुख होता है। तब जनकसुता हृदय में धीरज धरती हैं, नील कमल जैसे नेत्रों में जल भरकर सब सासुओं से जाकर मिलती हैं। उस समय धरती पर करुणा छा जाती है। सीता सबके पैरों लगकर बड़े अनुराग से भेंटती हैं, और वे प्रेमवश हृदय से आशीष देती हैं कि तुम सदा सुहाग से भरी रहो।
सीय आइ मुनिबर पग लागी । उचित असीस लही मन मागी ॥
गुरु-पतिनिहि मुनि-तियन्ह समेता । मिली प्रेम कहि जाइ न जेता ॥
sīya āi munibara paga lāgī | ucita asīsa lahī mana māgī ||
guru-patinihi muni-tiyanha sametā | milī prema kahi jāi na jetā ||
बन्दि बन्दि पग सिय सबही के । आसिरबचन लहे प्रिय जी के ॥
सासु सकल जब सीयँ निहारीं । मूदे नयन सहमि सुकुमारीं ॥
bandi bandi paga siya sabahī ke | āsirabacana lahe priya jī ke ||
sāsu sakala jaba sīyam̐ nihārīṃ | mūde nayana sahami sukumārīṃ ||
परीं बधिक बस मनहुं मरालीं । काह कीन्ह करतार कुचालीं ॥
तिन्ह सिय निरखि निपट दुख पावा । सो सब सहिय जो दैउ सहावा ॥
parīṃ badhika basa manahuṃ marālīṃ | kāha kīnha karatāra kucālīṃ ||
tinha siya nirakhi nipaṭa dukha pāvā | so saba sahiya jo daiu sahāvā ||
जनक-सुता तब उर धरि धीरा । नील-नलिन-लोयन भरि नीरा ॥
मिली सकल सासुन्ह सिय जाई । तेहि अवसर करुना महि छाई ॥
janaka-sutā taba ura dhari dhīrā | nīla-nalina-loyana bhari nīrā ||
milī sakala sāsunha siya jāī | tehi avasara karunā mahi chāī ||
लागि लागि पग सबनि सिय, भेंटति अति अनुराग ।
हृदयँ असीसहिँ प्रेम-बस, रहिअहु भरी सोहाग ॥
lāgi lāgi paga sabani siya, bheṃṭati ati anurāga |
hṛdayam̐ asīsahim̐ prema-basa, rahiahu bharī sohāga ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0