अयोध्याकाण्ड

अध्याय 247: राम को पिता के स्वर्गवास का समाचार

5 श्लोक · 247 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

राम को पिता के स्वर्गवास का समाचार

मुनि राजा के सुरलोक जाने का समाचार सुनाते हैं। सुनकर रघुनाथ असह दुख पाते हैं। अपना स्नेह ही मृत्यु का कारण विचारकर धीरज की धुरी धारण करने वाले राम बहुत व्याकुल हो जाते हैं। वज्र जैसी कठोर कड़वी वाणी सुनकर लक्ष्मण, सीता और सब रानियाँ विलाप करती हैं। सारा समाज शोक से इतना व्याकुल है मानो राजा आज ही गए हों। फिर मुनिवर राम को समझाते हैं और समाज सहित वे पवित्र नदी में स्नान करते हैं। उस दिन प्रभु निर्जल व्रत रखते हैं। मुनि के कहने पर भी किसी ने जल नहीं लिया। सबेरा होने पर मुनि ने जो आज्ञा दी, प्रभु ने वह सब श्रद्धा और भक्ति सहित आदर से किया।

247.1

बिकल सनेहँ सीय सब रानीं । बैठन सबहि कहेउ गुर ग्यानीं ॥
कहि जग गति मायिक मुनिनाथा । कहे कछुक परमारथ गाथा ॥

bikala saneham̐ sīya saba rānīṃ | baiṭhana sabahi kaheu gura gyānīṃ ||
kahi jaga gati māyika munināthā | kahe kachuka paramāratha gāthā ||

247.2

नृप कर सुरपुर-गवन सुनावा । सुनि रघुनाथ दुसह दुख पावा ॥
मरन-हेतु निज-नेह बिचारी । भे अति बिकल धीर-धुर-धारी ॥

nṛpa kara surapura-gavana sunāvā | suni raghunātha dusaha dukha pāvā ||
marana-hetu nija-neha bicārī | bhe ati bikala dhīra-dhura-dhārī ||

247.3

कुलिस-कठोर सुनत कटु बानी । बिलपत लखन सीय सब रानी ॥
सोक बिकल अति सकल समाजू । मानहुँ राज अकाजेउ आजू ॥

kulisa-kaṭhora sunata kaṭu bānī | bilapata lakhana sīya saba rānī ||
soka bikala ati sakala samājū | mānahum̐ rāja akājeu ājū ||

247.4

मुनिबर बहुरि राम समुझाये । सहित समाज सुसरित नहाये ॥
व्रत निरम्बु तेहि दिन प्रभु कीन्हा । मुनिहु कहें जल काहु न लीन्हा ॥

munibara bahuri rāma samujhāye | sahita samāja susarita nahāye ||
vrata nirambu tehi dina prabhu kīnhā | munihu kaheṃ jala kāhu na līnhā ||

दो॰ 247दोहा

भोर भये रघुनन्दनहिं, जो मुनि आयसु दीन्ह ।
श्रद्धा भगति समेत प्रभु, सो सब सादर कीन्ह ॥

bhora bhaye raghunandanahiṃ, jo muni āyasu dīnha |
śraddhā bhagati sameta prabhu, so saba sādara kīnha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0