अयोध्याकाण्ड

अध्याय 243: राम दौड़कर गुरु वसिष्ठ से मिलते हैं

5 श्लोक · 243 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

राम दौड़कर गुरु वसिष्ठ से मिलते हैं

गुरु का आना सुनकर शीलसिन्धु राम शत्रुघ्न को सीता के पास रखकर तुरंत चल पड़ते हैं। गुरु को देखकर दोनों भाई अनुराग से दण्डवत करने लगते हैं, पर मुनिवर दौड़कर उन्हें हृदय से लगा लेते हैं। प्रेम से पुलकित केवट अपना नाम बताकर दूर से दण्डवत करता है। ऋषि रामसखा को बरबस गले लगाते हैं, मानो धरती पर लोटते स्नेह को समेट लिया हो। देवता आकाश से रघुपति की भक्ति को सराहते हैं, जो सब मंगलों की जड़ है, और फूल बरसाते हैं। वे कहते हैं, इसके समान नीच कोई नहीं और वसिष्ठ के समान बड़ा जग में कौन? फिर भी मुनिराज उससे लक्ष्मण से भी अधिक प्रसन्न होकर मिले। यह सीतापति के भजन का प्रकट प्रताप है।

243.1

सीलसिन्धु सुनि गुरु आगवनू । सिय समीप राखे रिपुदवनू ॥
चले सबेग राम तेहि काला । धीर धरम-धुर दीनदयाला ॥

sīlasindhu suni guru āgavanū | siya samīpa rākhe ripudavanū ||
cale sabega rāma tehi kālā | dhīra dharama-dhura dīnadayālā ||

243.2

गुरुहि देखि सानुज अनुरागे । दंड-प्रनाम करन प्रभु लागे ॥
मुनिबर धाइ लिये उर लाई । प्रेम उमगि भेँटे दोउ भाई ॥

guruhi dekhi sānuja anurāge | daṃḍa-pranāma karana prabhu lāge ||
munibara dhāi liye ura lāī | prema umagi bhem̐ṭe dou bhāī ||

243.3

प्रेम पुलकि केवट कहि नामू । कीन्ह दूरि तें दंड-प्रनामू ॥
राम-सखा रिषि बरबस भेंटा । जनु महि लुठत सनेह समेटा ॥

prema pulaki kevaṭa kahi nāmū | kīnha dūri teṃ daṃḍa-pranāmū ||
rāma-sakhā riṣi barabasa bheṃṭā | janu mahi luṭhata saneha sameṭā ||

243.4

रघुपति-भगति सुमङ्गल-मूला । नभ सराहि सुर बरिसहिँ फूला ॥
एहि सम निपट नीच कोउ नाहीं । बड़ बसिष्ठ सम को जग माहीं ॥

raghupati-bhagati sumaṅgala-mūlā | nabha sarāhi sura barisahim̐ phūlā ||
ehi sama nipaṭa nīca kou nāhīṃ | bar̤a basiṣṭha sama ko jaga māhīṃ ||

दो॰ 243दोहा

जेहि लखि लखनहु से अधिक, मिले मुदित मुनिराउ ।
सो सीतापति भजन को, प्रगट प्रताप प्रभाउ ॥

jehi lakhi lakhanahu se adhika, mile mudita munirāu |
so sītāpati bhajana ko, pragaṭa pratāpa prabhāu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0