भेंटेउ लखन ललकि लघु भाई । बहुरि निषाद लीन्ह उर लाई ॥
पुनि मुनि-गन दुहुँ भाइन्ह बन्दे । अभिमत आसिष पाइ अनन्दे ॥
bheṃṭeu lakhana lalaki laghu bhāī | bahuri niṣāda līnha ura lāī ||
puni muni-gana duhum̐ bhāinha bande | abhimata āsiṣa pāi anande ||
5 श्लोक · 242 में से 326
लक्ष्मण ललककर छोटे भाई शत्रुघ्न से मिलते हैं, फिर निषाद को हृदय से लगाते हैं। मुनिगण दोनों भाइयों को आशीर्वाद देते हैं। भरत और शत्रुघ्न अनुराग से उमगकर सीता के चरणकमलों की रज सिर पर धरते हैं। सीता उन्हें उठाकर सिर पर करकमल फेरती हैं और बैठाती हैं। सीता मन ही मन आशीर्वाद देती हैं। सीता को सब प्रकार अनुकूल देखकर भरत निश्चिन्त होते हैं, उनके हृदय का व्यर्थ डर मिट जाता है। न कोई कुछ कहता है, न कोई कुछ पूछता है, प्रेम से भरा मन अपनी गति से खाली है। उस समय केवट धीरज धरकर हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं और कहते हैं, नाथ, मुनिनाथ के साथ सब माताएँ, पुरवासी, सेवक, सेनापति और मंत्री वियोग से व्याकुल होकर आए हैं।
भेंटेउ लखन ललकि लघु भाई । बहुरि निषाद लीन्ह उर लाई ॥
पुनि मुनि-गन दुहुँ भाइन्ह बन्दे । अभिमत आसिष पाइ अनन्दे ॥
bheṃṭeu lakhana lalaki laghu bhāī | bahuri niṣāda līnha ura lāī ||
puni muni-gana duhum̐ bhāinha bande | abhimata āsiṣa pāi anande ||
सानुज भरत उमगि अनुरागा । धरि सिर धरि सिय-पद-पदुम-परागा ॥
पुनि पुनि करत प्रनाम उठाये । सिर कर-कमल-परसि बैठाये ॥
sānuja bharata umagi anurāgā | dhari sira dhari siya-pada-paduma-parāgā ||
puni puni karata pranāma uṭhāye | sira kara-kamala-parasi baiṭhāye ||
सीयँ असीस दीन्हि मन माहीं । मगन सनेहँ देह सुधि नाहीं ॥
सब विधि सानुकूल लखि सीता । भे निसोच उर अपडर बीता ॥
sīyam̐ asīsa dīnhi mana māhīṃ | magana saneham̐ deha sudhi nāhīṃ ||
saba vidhi sānukūla lakhi sītā | bhe nisoca ura apaḍara bītā ||
कोउ किछु कहइ न कोउ किछु पूछा । प्रेम भरा मन निज-गति छूँछा ॥
तेहि अवसर केवट धीरज धरि । जोरि पानि बिनवत प्रनाम करि ॥
kou kichu kahai na kou kichu pūchā | prema bharā mana nija-gati chūm̐chā ||
tehi avasara kevaṭa dhīraja dhari | jori pāni binavata pranāma kari ||
नाथ साथ मुनिनाथ के, मातु सकल पुर लोग ।
सेवक सेनप सचिव सब, आये बिकल बियोग ॥
nātha sātha muninātha ke, mātu sakala pura loga |
sevaka senapa saciva saba, āye bikala biyoga ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0