अयोध्याकाण्ड

अध्याय 240: भरत चरणों में गिरे, राम ने हृदय लगाया

5 श्लोक · 240 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत चरणों में गिरे, राम ने हृदय लगाया

भरत हर्ष और शोक सब भूल जाते हैं। पाहि नाथ, पाहि गोसाईं कहकर वे लाठी की तरह धरती पर गिर पड़ते हैं। लक्ष्मण प्रेम भरे वचन पहचानते हैं और जान लेते हैं कि भरत प्रणाम कर रहे हैं। इस ओर भाई का सरस स्नेह है, उस ओर स्वामी की सेवा का प्रबल दायित्व। न मिलने जाते बनता है, न अनदेखा करते। वे सेवा को भारी मानकर रुके रहते हैं, जैसे खिलाड़ी चढ़ी पतंग को खींचे रखे। धरती पर माथा नवाकर प्रेम से कहते हैं, रघुनाथ, भरत प्रणाम कर रहे हैं। सुनते ही राम प्रेम में अधीर होकर उठते हैं, वस्त्र, तरकश और धनुष कहीं के कहीं। कृपानिधान बरबस उठाकर उन्हें हृदय से लगा लेते हैं। भरत और राम का मिलन देखकर सब अपनी सुध भूल जाते हैं।

240.1

सानुज सखा समेत मगन मन । बिसरे हरष-सोक-सुख-दुख गन ॥
पाहि नाथ कहि पाहि गोसाँई । भूतल परे लकुट की नाँई ॥

sānuja sakhā sameta magana mana | bisare haraṣa-soka-sukha-dukha gana ||
pāhi nātha kahi pāhi gosām̐ī | bhūtala pare lakuṭa kī nām̐ī ||

240.2

बचन सपेम लखन पहिचाने । करत प्रनाम भरत जियँ जाने ॥
बन्धु सनेह सरस एहि ओरा । उत साहिब सेवा बस जोरा ॥

bacana sapema lakhana pahicāne | karata pranāma bharata jiyam̐ jāne ||
bandhu saneha sarasa ehi orā | uta sāhiba sevā basa jorā ||

240.3

मिलि न जाइ नहिँ गुदरत बनई । सुकबि लखन मन की गति भनई ॥
रहे राखि सेवा पर भारू । चढ़ी चङ्ग जनु खैंच खेलारू ॥

mili na jāi nahim̐ gudarata banaī | sukabi lakhana mana kī gati bhanaī ||
rahe rākhi sevā para bhārū | car̤hī caṅga janu khaiṃca khelārū ||

240.4

कहत सप्रेम नाइ महि माथा । भरत प्रनाम करत रघुनाथा ॥
उठे राम सुनि पेम अधीरा । कहुँ पट कहुँ निषङ्ग धनु तीरा ॥

kahata saprema nāi mahi māthā | bharata pranāma karata raghunāthā ||
uṭhe rāma suni pema adhīrā | kahum̐ paṭa kahum̐ niṣaṅga dhanu tīrā ||

दो॰ 240दोहा

बरबस लिये उठाइ उर, लाये कृपानिधान ।
भरत राम की मिलनि लखि, बिसरे सबहि अपान ॥

barabasa liye uṭhāi ura, lāye kṛpānidhāna |
bharata rāma kī milani lakhi, bisare sabahi apāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0