अयोध्याकाण्ड

अध्याय 238: भरत को धूल में राम के चरणचिह्न मिलते हैं

5 श्लोक · 238 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत को धूल में राम के चरणचिह्न मिलते हैं

सखा के वचन सुनकर और वृक्ष देखकर भरत के नेत्र भर आते हैं। दोनों भाई प्रणाम करते चलते हैं। राम के चरणचिह्न देखकर वे ऐसे हर्षित होते हैं मानो कंगाल ने पारस पा लिया हो। उस धूल को सिर, हृदय और नेत्रों से लगाते हैं। भरत की अकथ दशा देखकर पक्षी, पशु और जड़ जीव भी प्रेम में मग्न हो जाते हैं। गुह स्नेहवश मार्ग भूल जाते हैं, तब देवता सुमार्ग बताकर फूल बरसाते हैं। यदि धरती पर भरत का भाव न होता तो जड़ को चेतन और चेतन को जड़ कौन करता? प्रेम का अमृत, विरह का मन्दराचल और भरत का गहरा सागर, कृपासिन्धु राम ने साधुओं के हित उसे मथकर प्रकट किया।

238.1

सखा बचन सुनि बिटप निहारी । उमगे भरत बिलोचन बारी ॥
करत प्रनाम चले दोउ भाई । कहत प्रीति सारद सकुचाई ॥

sakhā bacana suni biṭapa nihārī | umage bharata bilocana bārī ||
karata pranāma cale dou bhāī | kahata prīti sārada sakucāī ||

238.2

हरषहिँ निरखि राम-पद-अङ्का । मानहुँ पारस पायउ रङ्का ॥
रज सिर धरि हियँ नयनन्हि लावहिं । रघुबर मिलन सरिस सुख पावहिँ ॥

haraṣahim̐ nirakhi rāma-pada-aṅkā | mānahum̐ pārasa pāyau raṅkā ||
raja sira dhari hiyam̐ nayananhi lāvahiṃ | raghubara milana sarisa sukha pāvahim̐ ||

238.3

देखि भरत-गति अकथ अतीवा । प्रेम-मगन मृग खग-मृग जड़ जीवा ॥
सखहि सनेह-बिबस मग भूला । कहि सुपंथ सुर पहिँ फूला ॥

dekhi bharata-gati akatha atīvā | prema-magana mṛga khaga-mṛga jar̤a jīvā ||
sakhahi saneha-bibasa maga bhūlā | kahi supaṃtha sura pahim̐ phūlā ||

238.4

निरखि सिद्ध साधक अनुरागे । सहज सनेह सराहन लागे ॥
होत न भूतल भाउ भरत को । अचर सचर चर अचर करत को ॥

nirakhi siddha sādhaka anurāge | sahaja saneha sarāhana lāge ||
hota na bhūtala bhāu bharata ko | acara sacara cara acara karata ko ||

दो॰ 238दोहा

प्रेम-अमिय मन्दर-बिरह, भरत-पयोधि गंभीर ।
मथि प्रगटेउ सुर-साधु हित, कृपासिन्धु रघुबीर ॥

prema-amiya mandara-biraha, bharata-payodhi gaṃbhīra |
mathi pragaṭeu sura-sādhu hita, kṛpāsindhu raghubīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0