कुबरिहि रानि प्रान-प्रिय जानी । बार बार बड़ि बुद्धि बखानी ॥
तोहि सम हित न मोर संसारा । बहे जात कइ भइसि अधारा ॥
kubarihi rāni prāna-priya jānī | bāra bāra bar̤i buddhi bakhānī ||
tohi sama hita na mora saṃsārā | bahe jāta kai bhaisi adhārā ||
5 श्लोक · 23 में से 326
कुबड़ी को प्राणप्रिय जानकर रानी ने बार-बार उसकी बुद्धि सराही: संसार में तेरे समान मेरा कोई हितैषी नहीं, मैं बही जा रही थी, तू सहारा बनी। यदि विधाता कल मनोरथ पूरा करे तो तुझे आँखों की पुतली बनाकर रखूँगी। फिर कैकेयी कोपभवन में गईं। तुलसीदास कहते हैं: विपत्ति बीज है, दासी वर्षा ऋतु, कैकेयी की कुबुद्धि भूमि। कपट रूपी जल पाकर अंकुर फूटा, दोनों वरदान उसके दो पत्ते हैं और परिणाम दुःख का फल। कोप की सारी सामग्री सजाकर वे लेट गईं, अपनी ही कुमति से बिगड़ गईं। उधर राजमहल और नगर में उत्सव का कोलाहल है, इस कुचाल को कोई नहीं जानता। नर-नारी मंगलाचार सजा रहे हैं और राजदरबार में भीड़ आ-जा रही है।
कुबरिहि रानि प्रान-प्रिय जानी । बार बार बड़ि बुद्धि बखानी ॥
तोहि सम हित न मोर संसारा । बहे जात कइ भइसि अधारा ॥
kubarihi rāni prāna-priya jānī | bāra bāra bar̤i buddhi bakhānī ||
tohi sama hita na mora saṃsārā | bahe jāta kai bhaisi adhārā ||
जौँ बिधि पुरब मनोरथ काली । करउँ तोहि चख पूतरि आली ॥
बहु बिधि चेरिहि आदर देई । कोपभवन गवनी कैकेई ॥
jaum̐ bidhi puraba manoratha kālī | karaum̐ tohi cakha pūtari ālī ||
bahu bidhi cerihi ādara deī | kopabhavana gavanī kaikeī ||
बिपति बीज बरषा-रितु चेरी । भुइँ भइ कुमति कैकेई केरी ॥
पाइ कपट-जल अङ्कुर जामा । बर दोउ दल दुख-फल परिनामा ॥
bipati bīja baraṣā-ritu cerī | bhuim̐ bhai kumati kaikeī kerī ||
pāi kapaṭa-jala aṅkura jāmā | bara dou dala dukha-phala parināmā ||
कोप-समाज साजि सब सोई । राज करत निज कुमति बिगोई ॥
राउर नगर कोलाहल होई । यह कुचालि कछु जान न कोई ॥
kopa-samāja sāji saba soī | rāja karata nija kumati bigoī ||
rāura nagara kolāhala hoī | yaha kucāli kachu jāna na koī ||
प्रमुदित पुर नर नारि । सब सजहिँ सुमङ्गलचार ।
एक प्रबिसहिँ एक निर्गमहिँ, भीर भूप-दरबार ॥
pramudita pura nara nāri | saba sajahim̐ sumaṅgalacāra |
eka prabisahim̐ eka nirgamahim̐, bhīra bhūpa-darabāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0