अयोध्याकाण्ड

अध्याय 22: दो वरदान: भरत को राज, श्रीराम को वन

5 श्लोक · 22 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

दो वरदान: भरत को राज, श्रीराम को वन

कैकेयी को राज़ी करके कुबड़ी ने उनके हृदय रूपी पत्थर पर कपट की छुरी पैनी की। रानी पास आता दुःख वैसे ही नहीं देखतीं जैसे बलि का पशु हरी घास चरता है। मन्थरा की बात पहले कोमल और अन्त में कठोर है, मानो मधु में विष घोला हो। बोली, याद है, तुमने मुझे एक कथा सुनाई थी? राजा के पास तुम्हारे दो वरदान धरोहर हैं। आज उन्हें माँगो: पुत्र को राज्य और श्रीराम को वनवास, और सौत का सारा उल्लास ले लो। जब राजा श्रीराम की शपथ खाएँ, तभी माँगना, जिससे वचन टले नहीं। आज रात बीती तो काम बिगड़ जाएगा। यह बड़ा कुघात करके उस पापिनी ने कहा कि कोपभवन में जाओ, सावधानी से काम बनाना और सहसा विश्वास मत करना।

22.1

कुबरीं करि कबुली कैकेई । कपट-छुरी उर-पाहन टेई ॥
लखइ न रानि निकट दुख कैसे । चरइ हरित त्रिन बलि-पसु जैसें ॥

kubarīṃ kari kabulī kaikeī | kapaṭa-churī ura-pāhana ṭeī ||
lakhai na rāni nikaṭa dukha kaise | carai harita trina bali-pasu jaiseṃ ||

22.2

सुनत बात मृदु अन्त कठोरी । देत मनहुँ मधु माहुर घोरी ॥
कहइ चेरि सुधि अहइ कि नाहीँ । स्वामिनि कहिहु कथा मोहि पाहीँ ॥

sunata bāta mṛdu anta kaṭhorī | deta manahum̐ madhu māhura ghorī ||
kahai ceri sudhi ahai ki nāhīm̐ | svāmini kahihu kathā mohi pāhīm̐ ||

22.3

दुइ बरदान भूप सन थाती । माँगहु आजु जुड़ावहु छाती ॥
सुतहि राज रामहिँ बनबासू । देहु लेहु सब सवति हुलासु ॥

dui baradāna bhūpa sana thātī | mām̐gahu āju jur̤āvahu chātī ||
sutahi rāja rāmahim̐ banabāsū | dehu lehu saba savati hulāsu ||

22.4

भूपति राम-सपथ जब करई । तब मागेहु जेहिं बचन न टरई ॥
होइ अकाज आजु निसि बीतें । बचन मोर प्रिय मानेहु जी तेँ ॥

bhūpati rāma-sapatha jaba karaī | taba māgehu jehiṃ bacana na ṭaraī ||
hoi akāja āju nisi bīteṃ | bacana mora priya mānehu jī tem̐ ||

दो॰ 22दोहा

बड़ कुघात करि पातकिनि, कहेसि कोप-गृह जाहु ।
काज सँवारेहु सजग सब, सहसा जनि पतिआहु ॥

bar̤a kughāta kari pātakini, kahesi kopa-gṛha jāhu |
kāja sam̐vārehu sajaga saba, sahasā jani patiāhu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0