अयोध्याकाण्ड

अध्याय 224: भरत वनवासियों से राम का समाचार पूछते हैं

5 श्लोक · 224 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत वनवासियों से राम का समाचार पूछते हैं

भरत अपने गुणों के साथ राम के गुणों की कथा सुनते हैं और रघुनाथ का स्मरण करते चलते हैं। तीर्थ, आश्रम और देवस्थान देखकर स्नान और प्रणाम करते हैं। मन ही मन यही वर माँगते हैं कि सीता और राम के चरणकमलों में प्रेम हो। मार्ग में किरात, कोल, वानप्रस्थ, ब्रह्मचारी और विरक्त मिलते हैं। हर किसी को प्रणाम करके पूछते हैं कि लक्ष्मण, राम और वैदेही किस वन में हैं। वे सारा समाचार कहते हैं और भरत को देखकर जन्म का फल पाते हैं। जो कहता है कि हमने उन्हें सकुशल देखा, उसे भरत राम और लक्ष्मण के समान प्रिय मानते हैं। इस तरह वह दिन बीतता है और सबेरे सब राम दर्शन की लालसा लिए आगे चलते हैं।

224.1

निज गुन सहित राम-गुन-गाथा । सुनत जाहिँ सुमिरत रघुनाथा ॥
तीरथ मुनि-आस्त्रम सुर-धामा । निरखि निमज्जहिँ करहिँ प्रनामा ॥

nija guna sahita rāma-guna-gāthā | sunata jāhim̐ sumirata raghunāthā ||
tīratha muni-āstrama sura-dhāmā | nirakhi nimajjahim̐ karahim̐ pranāmā ||

224.2

मनहीं मन मागहिं बर एहू । सीय-राम-पद-पदुम सनेहू ॥
मिलहिँ किरात कोल बन-बासी । बैषानस बटु जती उदासी ॥

manahīṃ mana māgahiṃ bara ehū | sīya-rāma-pada-paduma sanehū ||
milahim̐ kirāta kola bana-bāsī | baiṣānasa baṭu jatī udāsī ||

224.3

करि प्रनाम पूँछहिं जेहिं तेही । केहि बन लखन-राम-बैदेही ॥
ते प्रभु समाचार सब कहहीँ । भरतहि देखि जनम-फल लहहीॅ ॥

kari pranāma pūm̐chahiṃ jehiṃ tehī | kehi bana lakhana-rāma-baidehī ||
te prabhu samācāra saba kahahīm̐ | bharatahi dekhi janama-phala lahahīॅ ||

224.4

जे जन कहहिॅ कुसल हम देखे । ते प्रिय राम-लखन-सम लेखे ॥
एहि बिधि बूझत सबहि सुबानी । सुनत राम-बनबास कहानी ॥

je jana kahahiॅ kusala hama dekhe | te priya rāma-lakhana-sama lekhe ||
ehi bidhi būjhata sabahi subānī | sunata rāma-banabāsa kahānī ||

दो॰ 224दोहा

तेहि बासर बसि प्रातहीं, चले सुमिरि रघुनाथ ।
राम-दरस की लालसा, भरत सरिस सब साथ ॥

tehi bāsara basi prātahīṃ, cale sumiri raghunātha |
rāma-darasa kī lālasā, bharata sarisa saba sātha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0