अयोध्याकाण्ड

अध्याय 225: गुह वह पर्वत दिखाते हैं जहाँ राम बसते हैं

5 श्लोक · 225 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

गुह वह पर्वत दिखाते हैं जहाँ राम बसते हैं

सबको मंगल शकुन होते हैं, नेत्र और भुजाएँ फड़कती हैं। भरत और समाज के मन में उत्साह है कि राम मिलेंगे और दुख की जलन मिटेगी। सब प्रेम की मदिरा में छके चलते हैं, अंग ढीले हैं, पैर डगमगाते हैं, वचन बेसुध निकलते हैं। उसी समय गुह वह पर्वत दिखाते हैं जो पर्वतों का शिरोमणि है, जिसके पास नदी तट पर सीता सहित दोनों वीर बसते हैं। उसे देखकर सब दण्डवत करते हैं और कहते हैं, जानकीजीवन राम की जय। राजसमाज ऐसा प्रेममग्न है मानो रघुराज फिर अवध लौट चले हों। उस समय भरत का प्रेम शेषनाग भी नहीं कह सकते। वह कवि के लिए वैसा ही अगम है जैसे अहंकारी के लिए ब्रह्मसुख।

225.1

मङ्गल सगुन होहिॅ सब काहू । फरकहिँ सुखद बिलोचन-बाहू ॥
भरतहि सहित समाज उछाहू । मिलिहहिँ राम मिटिहि दुख-दाह ॥

maṅgala saguna hohiॅ saba kāhū | pharakahim̐ sukhada bilocana-bāhū ||
bharatahi sahita samāja uchāhū | milihahim̐ rāma miṭihi dukha-dāha ||

225.2

करत मनोरथ जस जियँ जाके । जाहिँ सनेह सुराँ सब छाके ॥
सिथिल-अङ्ग पग मग डगि डोलहिँ । बिहबल बचन पेम-बस बोलहिँ ॥

karata manoratha jasa jiyam̐ jāke | jāhim̐ saneha surām̐ saba chāke ||
sithila-aṅga paga maga ḍagi ḍolahim̐ | bihabala bacana pema-basa bolahim̐ ||

225.3

राम-सखा तेहि समय देखावा । सैल-सिरोमनि सहज सुहावा ॥
जासु समीप सरित-पय-तीरा । सीय समेत बसहिँ दोउ बीरा ॥

rāma-sakhā tehi samaya dekhāvā | saila-siromani sahaja suhāvā ||
jāsu samīpa sarita-paya-tīrā | sīya sameta basahim̐ dou bīrā ||

225.4

देखि करहिँ सब दंड-प्रनामा । कहि जय जानकि जीवन रामा ॥
प्रेम मगन अस राज-समाजू । जनु फिरि अवध चले रघुराजू ॥

dekhi karahim̐ saba daṃḍa-pranāmā | kahi jaya jānaki jīvana rāmā ||
prema magana asa rāja-samājū | janu phiri avadha cale raghurājū ||

दो॰ 225दोहा

भरत प्रेम तेहि समय जस, तस कहि सकइ न सेषु ।
कबिहिं अगम जिमि ब्रह्मसुख, अह मम मलिन जनेषु ॥

bharata prema tehi samaya jasa, tasa kahi sakai na seṣu |
kabihiṃ agama jimi brahmasukha, aha mama malina janeṣu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0