अयोध्याकाण्ड

अध्याय 223: मार्ग के लोग भरत दर्शन को भाग्य मानते हैं

5 श्लोक · 223 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

मार्ग के लोग भरत दर्शन को भाग्य मानते हैं

स्त्रियाँ आगे कहती हैं, भरत का आचरण कहने सुनने से दुख और दोष मिटते हैं। राम के भाई ऐसे क्यों न हों? छोटे भाई सहित भरत को देखकर हम धन्य हो गईं। कुछ पछताती हैं कि ये कैकेयी जैसी माता के योग्य पुत्र नहीं। कोई कहती है, रानी का दोष नहीं, विधाता ने यह सब किया जो हम पर अनुकूल हुआ। कहाँ हम लोक और वेद की विधि से हीन, छोटे कुल की स्त्रियाँ, बुरे गाँव में बसने वाली, और कहाँ यह पुण्य का फल रूपी दर्शन। घर घर ऐसा अचरज है मानो मरुभूमि में कल्पवृक्ष उग आया हो। भरत के दर्शन से मार्ग के लोगों का भाग्य वैसे खुला जैसे सिंहल वासियों को प्रयाग सुलभ हो गया हो।

223.1

भायप भगति भरत आचरनू । कहत सुनत दुख-दूषन-हरनू ॥
जो किछु कहब थोर सखि सोई । राम-मातु अस काहे न होई ॥

bhāyapa bhagati bharata ācaranū | kahata sunata dukha-dūṣana-haranū ||
jo kichu kahaba thora sakhi soī | rāma-mātu asa kāhe na hoī ||

223.2

हम सब सानुज भरतहि देखें । भइन्ह धन्य जुबती-जन लेखें ॥
सुनि गुन देखि दसा पछिताहीँ । कैकइ जननि जोग सुत नाहीॅ ॥

hama saba sānuja bharatahi dekheṃ | bhainha dhanya jubatī-jana lekheṃ ||
suni guna dekhi dasā pachitāhīm̐ | kaikai janani joga suta nāhīॅ ||

223.3

कोउ कह दूषन रानिहि नाहिन । बिधि सबु कीन्ह हमहि जो दाहिन ॥
कहँ हम लोक-बेद-विधि हीनी । लघु-तिय कुल-करतूति मलीनी ॥

kou kaha dūṣana rānihi nāhina | bidhi sabu kīnha hamahi jo dāhina ||
kaham̐ hama loka-beda-vidhi hīnī | laghu-tiya kula-karatūti malīnī ||

223.4

बसहिँ कुदेस कुगाँव कुबामा । कहँ यह दरस पुन्य-परिनामा ॥
अस अनन्द अचरज प्रति-ग्रामा । जनु मरुभूमि कलपतरु जामा ॥

basahim̐ kudesa kugām̐va kubāmā | kaham̐ yaha darasa punya-parināmā ||
asa ananda acaraja prati-grāmā | janu marubhūmi kalapataru jāmā ||

दो॰ 223दोहा

भरत दरस देखत खुलेउ, मग-लोगन्ह कर भाग ।
जनु सिंघलबासिन्ह भयउ, बिधि-बस सुलभ प्रयाग ॥

bharata darasa dekhata khuleu, maga-loganha kara bhāga |
janu siṃghalabāsinha bhayau, bidhi-basa sulabha prayāga ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0