जमुन-तीर तेहि दिन करि बासू । भयउ समय सम सबहि सुपासू ॥
रात ही घाट घाट की तरनी । आईं अगनित जाहिँ न बरनी ॥
jamuna-tīra tehi dina kari bāsū | bhayau samaya sama sabahi supāsū ||
rāta hī ghāṭa ghāṭa kī taranī | āīṃ aganita jāhim̐ na baranī ||
5 श्लोक · 221 में से 326
उस दिन यमुना के तट पर डेरा रहता है। रात भर घाट घाट से अनगिनत नावें आती हैं और सबेरे सब एक ही खेप में पार हो जाते हैं। रामसखा गुह की सेवा से सब संतुष्ट हैं। नहाकर और नदी को सिर नवाकर सब चलते हैं। आगे मुनि वसिष्ठ रथ पर हैं, पीछे राजसमाज, और उसके पीछे दोनों भाई पैदल, बिना गहनों के, सादे वस्त्रों में। साथ में सेवक, मित्र और मंत्रियों के पुत्र हैं। सब लक्ष्मण, सीता और श्रीराम का स्मरण करते चलते हैं। जहाँ जहाँ राम ने विश्राम किया था, वहाँ वहाँ प्रेम से प्रणाम करते हैं। मार्ग के नर नारी घर और काम छोड़कर दौड़ते हैं और उनका रूप देखकर जन्म का फल पाते हैं।
जमुन-तीर तेहि दिन करि बासू । भयउ समय सम सबहि सुपासू ॥
रात ही घाट घाट की तरनी । आईं अगनित जाहिँ न बरनी ॥
jamuna-tīra tehi dina kari bāsū | bhayau samaya sama sabahi supāsū ||
rāta hī ghāṭa ghāṭa kī taranī | āīṃ aganita jāhim̐ na baranī ||
प्रात पार भये एकहि खेंवाँ । तोषे रामसखा की सेवाँ ॥
चले नहाइ नदिहि सिर नाई । साथ निषादनाथ दोउ भाई ॥
prāta pāra bhaye ekahi kheṃvām̐ | toṣe rāmasakhā kī sevām̐ ||
cale nahāi nadihi sira nāī | sātha niṣādanātha dou bhāī ||
आगें मुनिबर बाहन आछें । राज-समाज जाइ सब पाछें ॥
तेहिं पाछें दोउ बन्धु पयादें । भूषन बसन बेष सुठि सादें ॥
āgeṃ munibara bāhana ācheṃ | rāja-samāja jāi saba pācheṃ ||
tehiṃ pācheṃ dou bandhu payādeṃ | bhūṣana basana beṣa suṭhi sādeṃ ||
सेवक सुहृद सचिव-सुत साथा । सुमिरत लखन-सीय-रघुनाथा ॥
जहँ जहँ राम बास बिस्रामा । तहँ तहँ करहिँ सप्रेम प्रनामा ॥
sevaka suhṛda saciva-suta sāthā | sumirata lakhana-sīya-raghunāthā ||
jaham̐ jaham̐ rāma bāsa bisrāmā | taham̐ taham̐ karahim̐ saprema pranāmā ||
मग-बासी नर-नारि सुनि, धाम काम तजि धाइ ।
देखि सरूप सनेह बस, मुदित जनम फल पाइ ॥
maga-bāsī nara-nāri suni, dhāma kāma taji dhāi |
dekhi sarūpa saneha basa, mudita janama phala pāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0