अयोध्याकाण्ड

अध्याय 222: गाँव की स्त्रियों का संदेह, क्या राम लौटे

5 श्लोक · 222 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

गाँव की स्त्रियों का संदेह, क्या राम लौटे

मार्ग की स्त्रियाँ आपस में कहती हैं, सखी, ये राम और लक्ष्मण हैं या नहीं? वही आयु, वही शरीर, वही रंग रूप, वही शील और चाल। पर वेष वह नहीं है, सीता साथ नहीं हैं और आगे चतुरंगिणी सेना चल रही है। मुख प्रसन्न नहीं, मन में खेद है। इसी भेद से संदेह होता है। सब स्त्रियाँ उसे सबसे सयानी कहती हैं। तब दूसरी स्त्री, जो सच जानती है, मधुर वचन बोलती है। वह सुनाती है कि राम के राज्याभिषेक का रस कैसे भंग हुआ, फिर भरत के शील और स्नेह की बड़ाई करती है। पिता का दिया राज छोड़कर, पैदल चलकर, फल खाकर वे राम को मनाने जा रहे हैं। आज भरत जैसा कौन है?

222.1

कहहिॅ सप्रेम एक एक पाहीँ । राम-लखन सखि होहिॅ कि नाहीँ ॥
बय बपु बरन रूप सोइ आली । सील-सनेह-सरिस सम-चाली ॥

kahahiॅ saprema eka eka pāhīm̐ | rāma-lakhana sakhi hohiॅ ki nāhīm̐ ||
baya bapu barana rūpa soi ālī | sīla-saneha-sarisa sama-cālī ||

222.2

बेष न सो सखि सीय न सङ्गा । आगें अनी चली चतुरङ्गा ॥
नहिँ प्रसन्न-मुख मानस-खेदा । सखि सन्देह होइ एहिं भेदा ॥

beṣa na so sakhi sīya na saṅgā | āgeṃ anī calī caturaṅgā ||
nahim̐ prasanna-mukha mānasa-khedā | sakhi sandeha hoi ehiṃ bhedā ||

222.3

तासु तरक तिय-गन मन मानी । कहहिँ सकल तेहि सम न सयानी ॥
तेहि सराहि बानी फुरि पूजी । बोली मधुर बचन तिय दूजी ॥

tāsu taraka tiya-gana mana mānī | kahahim̐ sakala tehi sama na sayānī ||
tehi sarāhi bānī phuri pūjī | bolī madhura bacana tiya dūjī ||

222.4

कहि सप्रेम सब कथा-प्रसङ्ग । जेहि बिधि राम-राज-रस-भंगू ॥
भरतहि बहुरि सराहन लागी । सील सनेह सुभाय सुभागी ॥

kahi saprema saba kathā-prasaṅga | jehi bidhi rāma-rāja-rasa-bhaṃgū ||
bharatahi bahuri sarāhana lāgī | sīla saneha subhāya subhāgī ||

दो॰ 222दोहा

चलत पयादें खात फल, पिता-दीन्ह तजि राज ।
जात मनावन रघुबरहि, भरत सरिस को आज ॥

calata payādeṃ khāta phala, pitā-dīnha taji rāja |
jāta manāvana raghubarahi, bharata sarisa ko āja ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0