सत्यसन्ध प्रभु-सुर-हितकारी । भरत राम-आयसु अनुसारी ॥
स्वारथ-बिबस बिकल तुम्ह होहू । भरत दोष नहिँ राउर मोहू ॥
satyasandha prabhu-sura-hitakārī | bharata rāma-āyasu anusārī ||
svāratha-bibasa bikala tumha hohū | bharata doṣa nahim̐ rāura mohū ||
5 श्लोक · 220 में से 326
बृहस्पति बात पूरी करते हैं कि भरत राम की आज्ञा पर चलने वाले हैं और प्रभु सत्यसंध तथा देवताओं के हितकारी हैं। तुम केवल स्वार्थ से व्याकुल हो, भरत का कोई दोष नहीं। यह सुनकर इन्द्र की ग्लानि मिट जाती है, वे फूल बरसाकर भरत के स्वभाव की सराहना करते हैं। भरत आगे चलते हैं तो मुनि और सिद्ध उनकी दशा पर ललचाते हैं। जब वे राम कहकर साँस लेते हैं, तब मानो चारों ओर प्रेम उमड़ पड़ता है। उनके वचन से पत्थर भी पिघलते हैं। एक पड़ाव के बाद सब यमुना पहुँचते हैं। जल का साँवला रंग राम के शरीर जैसा देखकर पूरा समाज विरह के सागर में डूबता है और विवेक के जहाज़ पर ही टिका रहता है।
सत्यसन्ध प्रभु-सुर-हितकारी । भरत राम-आयसु अनुसारी ॥
स्वारथ-बिबस बिकल तुम्ह होहू । भरत दोष नहिँ राउर मोहू ॥
satyasandha prabhu-sura-hitakārī | bharata rāma-āyasu anusārī ||
svāratha-bibasa bikala tumha hohū | bharata doṣa nahim̐ rāura mohū ||
सुनि सुरबर सुरगुरु-बर-बानी । भा, प्रमोद मन मिटी गलानी ॥
बरषि प्रसून हरषि सुरराऊ । लगे सराहन भरत सुभाऊ ॥
suni surabara suraguru-bara-bānī | bhā, pramoda mana miṭī galānī ||
baraṣi prasūna haraṣi surarāū | lage sarāhana bharata subhāū ||
एहि बिधि भरत चले मग जाहीँ । दसा देखि मुनि सिद्ध सिहाहीं ॥
जबहिँ राम कहि लेहिँ उसासा । उमगत पेमु मनहुँ चहुँ पासा ॥
ehi bidhi bharata cale maga jāhīm̐ | dasā dekhi muni siddha sihāhīṃ ||
jabahim̐ rāma kahi lehim̐ usāsā | umagata pemu manahum̐ cahum̐ pāsā ||
द्रवहिॅ बचन सुनि कुलिस पखाना । पुरजन पेमु न जाइ बखाना ॥
बीच बास करि जमुनहिँ आये । निरखि नीर लोचन जल छाये ॥
dravahiॅ bacana suni kulisa pakhānā | purajana pemu na jāi bakhānā ||
bīca bāsa kari jamunahim̐ āye | nirakhi nīra locana jala chāye ||
रघुबर-बरन बिलोकि बर, बारि समेत समाज ।
होत मगन बारिधि बिरह, चढ़े बिबेक जहाज़ ॥
raghubara-barana biloki bara, bāri sameta samāja |
hota magana bāridhi biraha, car̤he bibeka jahāza ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0