मुनि प्रभाव जब भरत बिलोका । सब लघु लगे लोकपति लोका ॥
सुख समाज नहिँ जाइ बखानी । देखत बिरति बिसारहिँ ज्ञानी ॥
muni prabhāva jaba bharata bilokā | saba laghu lage lokapati lokā ||
sukha samāja nahim̐ jāi bakhānī | dekhata birati bisārahim̐ jñānī ||
5 श्लोक · 215 में से 326
जब भरत ने मुनि का प्रभाव देखा, तो लोकपालों के सब लोक छोटे लगने लगे। आसन, शय्या, सुन्दर वस्त्र, चँदोवे, वन, वाटिकाएँ, अनेक पक्षी और मृग, सुगन्धित फूल, अमृत जैसे फल, अनेक प्रकार के निर्मल जलाशय, अमृत से भी पवित्र भोजन और पेय, जिन्हें देखकर लोग संयमी की तरह सकुचाते हैं। सबके पास कामधेनु और कल्पवृक्ष हैं, जिन्हें देखकर इन्द्र और शची भी ललचाएँ। वसन्त ऋतु है, शीतल मंद सुगन्ध हवा बहती है, चारों पदार्थ सबको सुलभ हैं। माला, चन्दन और सब भोग देखकर लोग हर्ष और विस्मय में हैं। सम्पत्ति चकवी है और भरत चकवा, मुनि की आज्ञा खेल है, उस रात आश्रम के पिंजरे में दोनों साथ रखे गए, फिर भी मिलन न हुआ और सवेरा हो गया।
मुनि प्रभाव जब भरत बिलोका । सब लघु लगे लोकपति लोका ॥
सुख समाज नहिँ जाइ बखानी । देखत बिरति बिसारहिँ ज्ञानी ॥
muni prabhāva jaba bharata bilokā | saba laghu lage lokapati lokā ||
sukha samāja nahim̐ jāi bakhānī | dekhata birati bisārahim̐ jñānī ||
आसन सयन सुबसन बिताना । बन बाटिका बिहग मृग नाना ॥
सुरभि-फूल फल-अमिय समाना । बिमल जलासय विविध विधाना ॥
āsana sayana subasana bitānā | bana bāṭikā bihaga mṛga nānā ||
surabhi-phūla phala-amiya samānā | bimala jalāsaya vividha vidhānā ||
असन पान सुचि अमिय अमी से । देखि लोग सकुचात जमी से ॥
सुर-सुरभी सुरतरु सबही कें । लखि अभिलाष सुरेस सची कें ॥
asana pāna suci amiya amī se | dekhi loga sakucāta jamī se ||
sura-surabhī surataru sabahī keṃ | lakhi abhilāṣa suresa sacī keṃ ||
रितु-बसन्त वह त्रिबिधि बयारी । सब कहँ सुलभ पदारथ चारी ॥
सक चन्दन बनितादिक भोगा । देखि हरष-बिसमय बस लोगा ॥
ritu-basanta vaha tribidhi bayārī | saba kaham̐ sulabha padāratha cārī ||
saka candana banitādika bhogā | dekhi haraṣa-bisamaya basa logā ||
सम्पत्ति-चकई भरतु-चक, मुनि-आयसु खेलवार ।
तेहि निसि आस्रम पिंजराँ, राखे भा भिनुसार ॥
sampatti-cakaī bharatu-caka, muni-āyasu khelavāra |
tehi nisi āsrama piṃjarām̐, rākhe bhā bhinusāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0