कीरति-बिधु तुम्ह कीन्हि अनूपा । जहँ बस राम-प्रेम मृग-रूपा ॥
तात गलानि करहु जियँ जाये । डरहु दरिद्रहि पारस पाये ॥
kīrati-bidhu tumha kīnhi anūpā | jaham̐ basa rāma-prema mṛga-rūpā ||
tāta galāni karahu jiyam̐ jāye | ḍarahu daridrahi pārasa pāye ||
5 श्लोक · 210 में से 326
भरद्वाज कहते हैं, तुमने यश रूपी अनुपम चन्द्रमा बनाया है, जिसमें राम प्रेम हिरन के चिह्न की तरह बसता है। तात, मन में ग्लानि करना पारस पाकर दरिद्रता से डरने जैसा है। सब साधनों का सुन्दर फल लक्ष्मण, राम और सीता का दर्शन मिला। उस फल का फल तुम्हारा दर्शन है, प्रयाग सहित यह हमारा सौभाग्य है। भरत, तुम धन्य हो, तुमने यश से जगत जीत लिया। यह कहकर मुनि प्रेम में मग्न हो जाते हैं। सभासद हर्षित होते हैं, देवता फूल बरसाते हैं और प्रयाग के आकाश में धन्य धन्य की ध्वनि होती है। पुलकित शरीर, हृदय में राम सिया और नेत्रों में जल लिए भरत मुनिमंडली को प्रणाम कर गद्गद वाणी से बोलते हैं।
कीरति-बिधु तुम्ह कीन्हि अनूपा । जहँ बस राम-प्रेम मृग-रूपा ॥
तात गलानि करहु जियँ जाये । डरहु दरिद्रहि पारस पाये ॥
kīrati-bidhu tumha kīnhi anūpā | jaham̐ basa rāma-prema mṛga-rūpā ||
tāta galāni karahu jiyam̐ jāye | ḍarahu daridrahi pārasa pāye ||
सुनहु भरत हम झूठ न कहहीॅ । उदासीन तापस बन रहहीं ॥
सब साधन कर सुफल सुहावा । लखन राम सिय दरसन पावा ॥
sunahu bharata hama jhūṭha na kahahīॅ | udāsīna tāpasa bana rahahīṃ ||
saba sādhana kara suphala suhāvā | lakhana rāma siya darasana pāvā ||
तेहि फल कर फल दरस तुम्हारा । सहित पयाग सुभाग हमारा ॥
भरत धन्य तुम्ह जसु जग जस जयऊ । कहि अस पेम मगन मुनि भयऊ ॥
tehi phala kara phala darasa tumhārā | sahita payāga subhāga hamārā ||
bharata dhanya tumha jasu jaga jasa jayaū | kahi asa pema magana muni bhayaū ||
सुनि मुनि बचन सभासद हरषे । साधु सराहि सुमन सुर बरषे ॥
धन्य धन्य धुनि गगन पयागा । सुनि सुनि भरत मगन अनुरागा ॥
suni muni bacana sabhāsada haraṣe | sādhu sarāhi sumana sura baraṣe ||
dhanya dhanya dhuni gagana payāgā | suni suni bharata magana anurāgā ||
पुलक-गात हियँ-रामु सिय, सजल सरोरुह नयन ।
करि प्रनाम मुनि मंडलिहि, बोले गदगद बैन ॥
pulaka-gāta hiyam̐-rāmu siya, sajala saroruha nayana |
kari pranāma muni maṃḍalihi, bole gadagada baina ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0