अयोध्याकाण्ड

अध्याय 209: भरत का यश, कभी न अस्त होने वाला चन्द्रमा

5 श्लोक · 209 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत का यश, कभी न अस्त होने वाला चन्द्रमा

भरद्वाज कहते हैं, तात, तुम्हारा यश नवीन चन्द्रमा सा निर्मल है, और रघुवर के सेवक उसके कुमुद और चकोर हैं। यह सदा उदित रहेगा, कभी अस्त न होगा, न घटेगा, जगत रूपी आकाश में दिन दिन दूना बढ़ेगा। रात दिन सबको सुख देगा, कैकेयी की करनी रूपी राहु इसे नहीं ग्रसेगा। यह राम के सुन्दर प्रेम के अमृत से भरा है, गुरु के अपमान का दोष इसे दूषित नहीं करता। राम के भक्त अब अमृत से तृप्त हों, तुमने धरती पर अमृत सुलभ कर दिया। राजा भगीरथ गंगा लाए, दशरथ के गुण कहे नहीं जा सकते, जिनके स्नेह और संकोच के वश राम स्वयं प्रकट हुए, जिन्हें शिव के हृदय के नेत्र देखकर कभी नहीं अघाते।

209.1

नव-बिधु-बिमल तात जस तोरा । रघुबर-किङ्कर-कुमुद चकोरा ॥
उदित सदा अँथइहि कबहूँ ना । घटिहि न जग नभ दिन दिन दूना ॥

nava-bidhu-bimala tāta jasa torā | raghubara-kiṅkara-kumuda cakorā ||
udita sadā am̐thaihi kabahūm̐ nā | ghaṭihi na jaga nabha dina dina dūnā ||

209.2

कोक तिलोक प्रीति अति करिहीं । प्रभु प्रताप-रबि छबिहि न हरिहीॅ ॥
निसि दिन सुखद सदा सब काहू । ग्रसिहि न कैकइ करतब राहू ॥

koka tiloka prīti ati karihīṃ | prabhu pratāpa-rabi chabihi na harihīॅ ||
nisi dina sukhada sadā saba kāhū | grasihi na kaikai karataba rāhū ||

209.3

पूरन राम सुपेम पियूषा । गुरु-अपमान दोष नहिँ दूषा ॥
राम भगत अब अमिय अघाहूँ । कीन्हेहु सुलभ सुधा बसुधाहूँ ॥

pūrana rāma supema piyūṣā | guru-apamāna doṣa nahim̐ dūṣā ||
rāma bhagata aba amiya aghāhūm̐ | kīnhehu sulabha sudhā basudhāhūm̐ ||

209.4

भूप भगीरथ सुरसरि आनी । सुमिरत सकल सुमङ्गल-खानी ॥
दसरथ-गुन-गन बरनि न जाहीँ । अधिक कहा जेहि सम जग नाहीँ ॥

bhūpa bhagīratha surasari ānī | sumirata sakala sumaṅgala-khānī ||
dasaratha-guna-gana barani na jāhīm̐ | adhika kahā jehi sama jaga nāhīm̐ ||

दो॰ 209दोहा

जासु सनेह सकोच बस, राम प्रगट भये आइ ।
जे हर-हिय-नयननि कबहुँ, निरखे नहीं अघाइ ॥

jāsu saneha sakoca basa, rāma pragaṭa bhaye āi |
je hara-hiya-nayanani kabahum̐, nirakhe nahīṃ aghāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0