अयोध्याकाण्ड

अध्याय 211: भरत का दुःख केवल राम के लिए

5 श्लोक · 211 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत का दुःख केवल राम के लिए

भरत कहते हैं, मुनियों के इस समाज और तीर्थराज के सामने सच्ची शपथ भी व्यर्थ है, और यहाँ बात बनाकर कहना सबसे बड़ा पाप और अधमता है। मुझे माता की करनी का सोच नहीं, न इसका दुःख कि जगत मुझे नीच समझेगा। न परलोक बिगड़ने का डर है, न पिता की मृत्यु का शोक, उन्होंने पुण्य और सुयश से लोक भर दिए, लक्ष्मण और राम जैसे पुत्र पाए, और राम के विरह में क्षण में शरीर त्याग दिया। दुःख यह है कि राम, लक्ष्मण और सीता बिना जूतों के मुनि वेष में वन वन फिरते हैं, मृगचर्म पहनते हैं, फल खाते हैं, कुश और पत्ते बिछाकर धरती पर सोते हैं और पेड़ों तले जाड़ा, धूप, वर्षा और हवा सहते हैं।

211.1

मुनि समाज अरु तीरथराजू । साँचिहुँ सपथ अघाइ अकाजू ॥
एहिं थल जैॉ किछु कहिय बनाई । एहि सम अधिक न अघ अधमाई ॥

muni samāja aru tīratharājū | sām̐cihum̐ sapatha aghāi akājū ||
ehiṃ thala jaiॉ kichu kahiya banāī | ehi sama adhika na agha adhamāī ||

211.2

तुम्ह सर्बज्ञ कहउँ सतिभाऊ । उर-अन्तरजामी रघुराऊ ॥
मोहि न मातु करतब कर सोचू । नहिँ दुख जियँ जग जानहि पोचू ॥

tumha sarbajña kahaum̐ satibhāū | ura-antarajāmī raghurāū ||
mohi na mātu karataba kara socū | nahim̐ dukha jiyam̐ jaga jānahi pocū ||

211.3

नाहि न डर बिगरिहि परलोकू । पितहु मरन कर मोहि न सोकू ॥
सुकृत सुजस भरि भुवन सुहाये । लछिमन राम सरिस सुत पाये ॥

nāhi na ḍara bigarihi paralokū | pitahu marana kara mohi na sokū ||
sukṛta sujasa bhari bhuvana suhāye | lachimana rāma sarisa suta pāye ||

211.4

राम-बिरहँ तजि तनु छनभंगू । भूप सोच कर कवन प्रसंगू ॥
राम-लखन-सिय बिनु पग पनहीॅ । करि मुनि बेष फिरहिँ बन बनहीॅ ॥

rāma-biraham̐ taji tanu chanabhaṃgū | bhūpa soca kara kavana prasaṃgū ||
rāma-lakhana-siya binu paga panahīॅ | kari muni beṣa phirahim̐ bana banahīॅ ||

दो॰ 211दोहा

अजिन-बसन फल-असन महि,-सयन डासि कुस पात ।
बसि तरु-तर नित सहत हिम, आतप बरषा बात ॥

ajina-basana phala-asana mahi,-sayana ḍāsi kusa pāta |
basi taru-tara nita sahata hima, ātapa baraṣā bāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0