सखा बचन सुनि उर धरि धीरा । बास चले सुमिरत रघुबीरा ॥
यह सुधि पाइ नगर नर-नारी । चले बिलोकन आरत भारी ॥
sakhā bacana suni ura dhari dhīrā | bāsa cale sumirata raghubīrā ||
yaha sudhi pāi nagara nara-nārī | cale bilokana ārata bhārī ||
6 श्लोक · 202 में से 326
सखा के वचन सुनकर भरत हृदय में धीरज धरते हैं और रघुवीर का स्मरण करते हुए डेरे पर लौटते हैं। यह समाचार पाकर नगर के नर नारी बड़ी व्याकुलता से वह स्थान देखने आते हैं। परिक्रमा करके प्रणाम करते हैं और कैकेयी को बहुत दोष देते हैं। कोई भरत के स्नेह की सराहना करता है, कोई कहता है कि राजा ने प्रेम निभाया। उस विमोह और विषाद को कौन कह सकता है? इस प्रकार सब लोग रात भर जागते रहे। सवेरा होते ही पार उतरना आरम्भ हुआ। गुह ने गुरु को सुन्दर नाव पर चढ़ाया और सब माताओं को नई नाव पर। प्रातःक्रिया करके, माताओं के चरणों की वन्दना कर और गुरु को सिर नवाकर भरत ने निषादों को आगे करके सेना चलाई।
सखा बचन सुनि उर धरि धीरा । बास चले सुमिरत रघुबीरा ॥
यह सुधि पाइ नगर नर-नारी । चले बिलोकन आरत भारी ॥
sakhā bacana suni ura dhari dhīrā | bāsa cale sumirata raghubīrā ||
yaha sudhi pāi nagara nara-nārī | cale bilokana ārata bhārī ||
परदखिना करि करहिँ प्रनामा । देहिॅ कैकइहि खोरि निकामा ॥
भरि भरि बारि बिलोचन लेंहीं । बाम बिधाताहि दूषन देहीं ॥
paradakhinā kari karahim̐ pranāmā | dehiॅ kaikaihi khori nikāmā ||
bhari bhari bāri bilocana leṃhīṃ | bāma bidhātāhi dūṣana dehīṃ ||
एक सराहहिँ भरत सनेहू । कोउ कह नृपति निबाहेउ नेहू ॥
निन्दहिँ आपु सराहि निषादहि । को कहि सकइ बिमोह बिषादहि ॥
eka sarāhahim̐ bharata sanehū | kou kaha nṛpati nibāheu nehū ||
nindahim̐ āpu sarāhi niṣādahi | ko kahi sakai bimoha biṣādahi ||
एहि बिधि राति लोग सब जागा । भा भिनुसार गुदारा लागा ॥
गुरुहि सुनावँ चढ़ाइ सुहाईं । नईं नाव सब मातु चढ़ाईं ॥
ehi bidhi rāti loga saba jāgā | bhā bhinusāra gudārā lāgā ||
guruhi sunāvam̐ car̤hāi suhāīṃ | naīṃ nāva saba mātu car̤hāīṃ ||
दंड चारि महँ भा सबु पारा । उतरि भरत तब सबहि सँभारा ॥
daṃḍa cāri maham̐ bhā sabu pārā | utari bharata taba sabahi sam̐bhārā ||
प्रातक्रिया करि मातु-पद, बन्दि गुरुहि सिर नाइ ।
आगें किये निषाद-गन, दीन्हेउ कटकु चलाइ ॥
prātakriyā kari mātu-pada, bandi guruhi sira nāi |
āgeṃ kiye niṣāda-gana, dīnheu kaṭaku calāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0