राम सुना दुख कान न काऊ । जीवन-तरु जिमि जोगवइ राऊ ॥
पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती । जोगवहिँ जननि सकल दिन राती ॥
rāma sunā dukha kāna na kāū | jīvana-taru jimi jogavai rāū ||
palaka nayana phani mani jehi bhām̐tī | jogavahim̐ janani sakala dina rātī ||
6 श्लोक · 201 में से 326
भरत विलाप करते हैं, राम ने कभी कानों से दुःख का नाम नहीं सुना। राजा उन्हें जीवन रूपी वृक्ष की तरह सहेजते थे, और माताएँ दिन रात ऐसे रखवाली करती थीं जैसे पलकें आँखों की और साँप मणि की। वही अब वन में पैदल फिरते हैं और कन्द, मूल, फल, फूल खाते हैं। मुझ पाप के सागर अभागे को धिक्कार है, जिसके कारण सब उत्पात हुआ। निषाद प्रेम से समझाते हैं, नाथ, व्यर्थ विषाद क्यों करते हैं? राम आपको प्रिय हैं और आप राम को, दोष उलटे विधाता का है, जिसने माता को बावली कर दिया। उस रात प्रभु बार बार आपकी सराहना करते रहे। अन्तर्यामी राम को आपसे प्यारा कोई नहीं। धीरज धरिए और विश्राम कीजिए।
राम सुना दुख कान न काऊ । जीवन-तरु जिमि जोगवइ राऊ ॥
पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती । जोगवहिँ जननि सकल दिन राती ॥
rāma sunā dukha kāna na kāū | jīvana-taru jimi jogavai rāū ||
palaka nayana phani mani jehi bhām̐tī | jogavahim̐ janani sakala dina rātī ||
ते अब फिरत बिपिन पद-चारी । कन्द-मूल-फल-फूल अहारी ॥
धिग कैकेई अमङ्गल मूला । भइसि प्रान-प्रियतम प्रतिकूला ॥
te aba phirata bipina pada-cārī | kanda-mūla-phala-phūla ahārī ||
dhiga kaikeī amaṅgala mūlā | bhaisi prāna-priyatama pratikūlā ||
मैं धिग धिग अघ-उदधि अभागी । सब उतपात भयउ जेहि लागी ॥
कुल-कलङ्क करि सृजेउ बिधाताँ । साइँदोह मोहि कीन्ह कुमाताँ ॥
maiṃ dhiga dhiga agha-udadhi abhāgī | saba utapāta bhayau jehi lāgī ||
kula-kalaṅka kari sṛjeu bidhātām̐ | sāim̐doha mohi kīnha kumātām̐ ||
मुनि सप्रेम समुझाव निषादू । नाथ करिअ कत बादि बिषादू ॥
राम तुम्हहिँ प्रिय तुम्ह प्रिय रामहि । यह निरजोसु दोसु बिधि बामहिॅ ॥
muni saprema samujhāva niṣādū | nātha karia kata bādi biṣādū ||
rāma tumhahim̐ priya tumha priya rāmahi | yaha nirajosu dosu bidhi bāmahiॅ ||
बिधि बाम की करनी कठिन जेंहिं, मातु कीन्ही बावरी ।
तेहि राति पुनि पुनि करहिँ प्रभु सादर सरहना रावरी ॥
तुलसी न तुम्ह सो राम प्रीतम, कहत हौँ सौहें किये ।
परिनाम मङ्गल जानि अपने, आनिये धीरज हिये ॥
bidhi bāma kī karanī kaṭhina jeṃhiṃ, mātu kīnhī bāvarī |
tehi rāti puni puni karahim̐ prabhu sādara sarahanā rāvarī ||
tulasī na tumha so rāma prītama, kahata haum̐ sauheṃ kiye |
parināma maṅgala jāni apane, āniye dhīraja hiye ||
अन्तरजामी राम, सकुच सप्रेम कृपायतन ।
चलिय करिय बिस्राम, यह विचार दृढ़ आनि मन ॥
antarajāmī rāma, sakuca saprema kṛpāyatana |
caliya kariya bisrāma, yaha vicāra dṛr̤ha āni mana ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0