लालन जोग लखन लघु लोने । भे न भाइ अस अहहिँ न होने ॥
पुरजन प्रिय पितु-मातु दुलारे । सिय-रघुबरहि प्रानपिआरे ॥
lālana joga lakhana laghu lone | bhe na bhāi asa ahahim̐ na hone ||
purajana priya pitu-mātu dulāre | siya-raghubarahi prānapiāre ||
5 श्लोक · 200 में से 326
भरत कहते हैं, सुन्दर छोटे भाई लक्ष्मण लाड़ करने योग्य हैं, ऐसा भाई न हुआ, न है, न होगा। वे पुरवासियों के प्रिय, माता पिता के दुलारे और सीता तथा रघुवर के प्राणप्यारे हैं। कोमल मूर्ति और सुकुमार स्वभाव वाले, जिनके शरीर को कभी गरम हवा भी नहीं लगी, वे वन में सब प्रकार की विपत्ति सह रहे हैं। मेरी इस छाती ने करोड़ों वज्रों का निरादर कर दिया। श्रीराम ने जन्म लेकर जगत को उजागर किया, वे रूप, शील, सुख और सब गुणों के सागर हैं। शत्रु भी राम की बड़ाई करते हैं। करोड़ों शेष भी प्रभु के गुणों का लेखा नहीं कर सकते। वे सुखस्वरूप रघुकुलमणि धरती पर कुश बिछाकर सोते हैं। विधाता की गति बड़ी बलवान है।
लालन जोग लखन लघु लोने । भे न भाइ अस अहहिँ न होने ॥
पुरजन प्रिय पितु-मातु दुलारे । सिय-रघुबरहि प्रानपिआरे ॥
lālana joga lakhana laghu lone | bhe na bhāi asa ahahim̐ na hone ||
purajana priya pitu-mātu dulāre | siya-raghubarahi prānapiāre ||
मृदु मूरति सुकुमार सुभाऊ । तात बाउ तन लाग न काऊ ॥
ते बन सहहिँ बिपति सब भाँती । निदरे कोटि कुलिस एहिं छाती ॥
mṛdu mūrati sukumāra subhāū | tāta bāu tana lāga na kāū ||
te bana sahahim̐ bipati saba bhām̐tī | nidare koṭi kulisa ehiṃ chātī ||
राम जनमि जग कीन्ह उजागर । रूप-सील-सुख सब गुन सागर ॥
पुरजन परिजन गुरु पितु माता । राम सुभाउ सबहि सुख-दाता ॥
rāma janami jaga kīnha ujāgara | rūpa-sīla-sukha saba guna sāgara ||
purajana parijana guru pitu mātā | rāma subhāu sabahi sukha-dātā ||
बैरिउ राम बड़ाई करहीँ । बोलनि मिलनि बिनय मन हरहीॅ ॥
सादर कोटि कोटि सत सेखा । करि न सकहिँ प्रभु-गुन-गन लेखा ॥
bairiu rāma bar̤āī karahīm̐ | bolani milani binaya mana harahīॅ ||
sādara koṭi koṭi sata sekhā | kari na sakahim̐ prabhu-guna-gana lekhā ||
सुखस्वरुप रघुबंसमनि, मङ्गल-मोद-निधान ।
ते सोवत कुस डासि महि, विधि गति अति बलवान ॥
sukhasvarupa raghubaṃsamani, maṅgala-moda-nidhāna |
te sovata kusa ḍāsi mahi, vidhi gati ati balavāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0