अयोध्याकाण्ड

अध्याय 199: कुश की साथरी देखकर भरत का शोक

5 श्लोक · 199 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

कुश की साथरी देखकर भरत का शोक

कुश की सुन्दर साथरी देखकर भरत प्रणाम करके परिक्रमा करते हैं। चरण चिह्नों की धूल आँखों से लगाते हैं, उनके प्रेम की अधिकता कहते नहीं बनती। सोने के दो चार कण देखकर उन्हें सीता के समान मानकर सिर पर रख लेते हैं। आँखों में जल और हृदय में ग्लानि भरकर वे सखा से कहते हैं। सीता के विरह में ये कण श्रीहीन और कान्तिहीन हो गए हैं, जैसे अवध के नर नारी। उनके पिता जनक की उपमा किससे दूँ, जिनकी हथेली में भोग और योग दोनों हैं। ससुर सूर्यकुल के सूर्य राजा थे, जिनसे इन्द्र भी ललचाते थे। प्राणनाथ रघुनाथ हैं, जिनकी बड़ाई से ही कोई बड़ा होता है। पतिव्रताओं में मणि सीता की साथरी देखकर भी मेरा हृदय नहीं फटता, यह वज्र से भी कठोर है।

199.1

कुस साँथरीनिहारि सुहाई । कीन्ह प्रनाम प्रदच्छिन जाई ॥
चरन रेख रज आँखिन्ह लाई । बनइ न कहत प्रीति अधिकाई ॥

kusa sām̐tharīnihāri suhāī | kīnha pranāma pradacchina jāī ||
carana rekha raja ām̐khinha lāī | banai na kahata prīti adhikāī ||

199.2

कनक बिन्दु दुइ चारिक देखे । राखे सीस सीय सम लेखे ॥
सजल बिलोचन हृदयँ गलानी । कहत सखा सन बचन सुबानी ॥

kanaka bindu dui cārika dekhe | rākhe sīsa sīya sama lekhe ||
sajala bilocana hṛdayam̐ galānī | kahata sakhā sana bacana subānī ||

199.3

श्रीहत सीय-बिरहँ दुति-हीना । जथा अवध नर-नारि बिलीना ॥
पिता जनक देउँ पटतर केही । करतल भोगु जोग जग जेही ॥

śrīhata sīya-biraham̐ duti-hīnā | jathā avadha nara-nāri bilīnā ||
pitā janaka deum̐ paṭatara kehī | karatala bhogu joga jaga jehī ||

199.4

ससुर भानुकुल-भानु भुआलू । जेहि सिहात अमरावति-पालू ॥
प्राननाथ रघुनाथ गोसाँई । जो बड़ होत से राम बड़ाई ॥

sasura bhānukula-bhānu bhuālū | jehi sihāta amarāvati-pālū ||
prānanātha raghunātha gosām̐ī | jo bar̤a hota se rāma bar̤āī ||

दो॰ 199दोहा

पति देवता सुतीय मनि, सीय साँथरी देखि ।
बिहरत ह्रदउ न हहरि हर, पबि तें कठिन बिसेषि ॥

pati devatā sutīya mani, sīya sām̐tharī dekhi |
biharata hradau na hahari hara, pabi teṃ kaṭhina biseṣi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0