जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा । भरत सोध सब ही कर लीन्हा ॥
गुरु सेवा करि आयसु पाई । राम-मातु पहिँ गे दोउ भाई ॥
jaham̐ taham̐ loganha ḍerā kīnhā | bharata sodha saba hī kara līnhā ||
guru sevā kari āyasu pāī | rāma-mātu pahim̐ ge dou bhāī ||
5 श्लोक · 198 में से 326
लोग जहाँ तहाँ डेरा करते हैं और भरत सबकी सुधि लेते हैं। गुरु की सेवा करके और आज्ञा पाकर दोनों भाई राम की माता के पास जाते हैं। माताओं की सेवा भाई को सौंपकर वे निषाद को बुला लेते हैं। वे सखा से कहते हैं, वह स्थान दिखाओ और मेरे नेत्रों और मन की जलन तनिक ठंडी करो, जहाँ सीता, राम और लक्ष्मण रात को सोए थे। कहते कहते उनकी आँखें भर आती हैं। भरत के वचन सुनकर निषाद को विषाद होता है और वह तुरंत उन्हें वहाँ ले जाता है। जहाँ पवित्र शीशम के पेड़ तले रघुवर ने विश्राम किया था, वहाँ भरत अत्यन्त स्नेह और आदर से दंडवत प्रणाम करते हैं।
जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा । भरत सोध सब ही कर लीन्हा ॥
गुरु सेवा करि आयसु पाई । राम-मातु पहिँ गे दोउ भाई ॥
jaham̐ taham̐ loganha ḍerā kīnhā | bharata sodha saba hī kara līnhā ||
guru sevā kari āyasu pāī | rāma-mātu pahim̐ ge dou bhāī ||
चरन चाँपि कहि कहि मृदु बानी । जननीं सकल भरत सनमानी ॥
भाइहि सौंपि मातु-सेवकाई । आपु निषादहि लीन्ह बोलाई ॥
carana cām̐pi kahi kahi mṛdu bānī | jananīṃ sakala bharata sanamānī ||
bhāihi sauṃpi mātu-sevakāī | āpu niṣādahi līnha bolāī ||
चले सखा कर सोँ कर जोरें । सिथिल सरीर सनेह न थोरें ॥
पूछत सखहि सो ठाउँ देखाऊ । नेकु नयन मन जरनि जुड़ाऊ ॥
cale sakhā kara som̐ kara joreṃ | sithila sarīra saneha na thoreṃ ||
pūchata sakhahi so ṭhāum̐ dekhāū | neku nayana mana jarani jur̤āū ||
जहँ सिय-राम-लखन निसि सोये । कहत भरे जन लोचन कोये ॥
भरत बचन सुनि भयउ बिषादू । तुरत तहाँ लइ गयउ निषादू ॥
jaham̐ siya-rāma-lakhana nisi soye | kahata bhare jana locana koye ||
bharata bacana suni bhayau biṣādū | turata tahām̐ lai gayau niṣādū ||
जहँ सिंसुपा पुनीत तरु, रघुबर किय विश्राम ।
अति सनेहँ सादर भरत, कीन्हेउ दंड प्रनाम ॥
jaham̐ siṃsupā punīta taru, raghubara kiya viśrāma |
ati saneham̐ sādara bharata, kīnheu daṃḍa pranāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0