अयोध्याकाण्ड

अध्याय 187: चित्रकूट की ओर यात्रा आरम्भ

5 श्लोक · 187 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

चित्रकूट की ओर यात्रा आरम्भ

जैसे चकवा चकवी प्रभात चाहते हैं, वैसे ही नगर के नर नारी हृदय में भारी आतुरता से सवेरे की प्रतीक्षा करते हैं। भरत ने चतुर मंत्रियों को बुलाकर कहा, तिलक की सब सामग्री ले चलो, वन में ही मुनि श्रीराम को राज देंगे। यह सुनकर मंत्री प्रणाम करते हैं और तुरंत घोड़े, रथ और हाथी सजा देते हैं। सबसे पहले मुनिराज वसिष्ठ अरुन्धती और अग्निहोत्र की सामग्री के साथ रथ पर चढ़कर चले। नगर के लोग अपने अपने वाहन सजाकर चित्रकूट की ओर चल पड़े। रानियाँ ऐसी सुन्दर पालकियों में चलीं जिनका वर्णन नहीं हो सकता। नगर पवित्र सेवकों को सौंपकर और सबको आदर से आगे चलाकर, राम और सीता के चरणों का स्मरण करते हुए दोनों भाई भरत और शत्रुघ्न चले।

187.1

चक्क चक्कि जिमि पुर-नर-नारी । चहत प्रात उर आरत भारी ॥
जागत सब निसि भयउ बिहाना । भरत बोलाये सचिव सुजाना ॥

cakka cakki jimi pura-nara-nārī | cahata prāta ura ārata bhārī ||
jāgata saba nisi bhayau bihānā | bharata bolāye saciva sujānā ||

187.2

कहेउ लेहु सब तिलक-समाजू । बनहिं देव मुनि रामहिं राजू ॥
बेगि चलहु सुनि सचिव जोहारे । तुरत तुरग रथ नाग सँवारे ॥

kaheu lehu saba tilaka-samājū | banahiṃ deva muni rāmahiṃ rājū ||
begi calahu suni saciva johāre | turata turaga ratha nāga sam̐vāre ||

187.3

अरुन्धती अरु अगिनि समाऊ । रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ ॥
बिप्र बृन्द चढ़ि बाहन नाना । चले सकल तप तेज निधाना ॥

arundhatī aru agini samāū | ratha car̤hi cale prathama munirāū ||
bipra bṛnda car̤hi bāhana nānā | cale sakala tapa teja nidhānā ||

187.4

नगर लोग सब सजि सजि जाना । चित्रकूट कहँ कीन्ह पयाना ॥
सिबिका सुभग न जाहिँ बखानी । चढ़ि चढ़ि चलत भई सब रानी ॥

nagara loga saba saji saji jānā | citrakūṭa kaham̐ kīnha payānā ||
sibikā subhaga na jāhim̐ bakhānī | car̤hi car̤hi calata bhaī saba rānī ||

दो॰ 187दोहा

सौंपि नगर सुचि सेवकनि, सादर सबहि चलाइ ।
सुमिरि राम सिय चरन तब, चले भरत दोउ भाइ ॥

sauṃpi nagara suci sevakani, sādara sabahi calāi |
sumiri rāma siya carana taba, cale bharata dou bhāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0