भरत बचन सब कहँ प्रिय लागे । राम-सनेह-सुधाँ जनु पागे ॥
लोग बियोग विषम बिष दागे । मन्त्र सबीज सुनत जनु जागे ॥
bharata bacana saba kaham̐ priya lāge | rāma-saneha-sudhām̐ janu pāge ||
loga biyoga viṣama biṣa dāge | mantra sabīja sunata janu jāge ||
5 श्लोक · 184 में से 326
भरत के वचन सबको प्रिय लगते हैं, मानो राम प्रेम के अमृत में पगे हों। माताएँ, मंत्री, गुरु और नगर के नर नारी स्नेह से अत्यन्त व्याकुल होकर भरत की बार बार सराहना करते हैं, तुम्हारा शरीर राम प्रेम की मूर्ति है। तात भरत, तुम ऐसा क्यों न कहो, राम तुम्हें प्राणों के समान प्रिय हैं। जो नीच अपनी जड़ता से माता की कुटिलता का दोष तुम पर लगाएगा, वह करोड़ों पुरखों सहित सौ कल्प तक नरक में बसेगा। साँप की मणि उसके पाप और अवगुण ग्रहण नहीं करती, वह विष हरती और दुःख दरिद्रता जलाती है। सब कहते हैं, जहाँ राम हैं उस वन को अवश्य चलिए, भरत ने अच्छी सलाह दी। शोक सागर में डूबते सबको तुमने सहारा दिया।
भरत बचन सब कहँ प्रिय लागे । राम-सनेह-सुधाँ जनु पागे ॥
लोग बियोग विषम बिष दागे । मन्त्र सबीज सुनत जनु जागे ॥
bharata bacana saba kaham̐ priya lāge | rāma-saneha-sudhām̐ janu pāge ||
loga biyoga viṣama biṣa dāge | mantra sabīja sunata janu jāge ||
मातु सचिव गुरु पुर नर नारी । सकल सनेहँ बिकल भये भारी ॥
भरतहि कहहिं सराहि सराही । राम-प्रेम मूरति तनु आही ॥
mātu saciva guru pura nara nārī | sakala saneham̐ bikala bhaye bhārī ||
bharatahi kahahiṃ sarāhi sarāhī | rāma-prema mūrati tanu āhī ||
तात भरत अस काहे न कहहू । प्रान समान राम प्रिय अहहू ॥
जो पावँरु अपनी जड़ताई । तुम्हहिँ सुगाइ मातु कुटिलाई ॥
tāta bharata asa kāhe na kahahū | prāna samāna rāma priya ahahū ||
jo pāvam̐ru apanī jar̤atāī | tumhahim̐ sugāi mātu kuṭilāī ||
सो सठ कोटिक-पुरुष समेता । बसहिँ कलप-सत नरक-निकेता ॥
अहि-अघ अवगुन नहि मनि गहई । हरइ गरल दुख-दारिद दहई ॥
so saṭha koṭika-puruṣa sametā | basahim̐ kalapa-sata naraka-niketā ||
ahi-agha avaguna nahi mani gahaī | harai garala dukha-dārida dahaī ||
अवसि चलिय बन रामु जहँ, भरत मन्त्र भल कीन्ह ।
सोक सिन्धु बूड़त सबहि, तुम्ह अवलम्बन दीन्ह ॥
avasi caliya bana rāmu jaham̐, bharata mantra bhala kīnha |
soka sindhu būr̤ata sabahi, tumha avalambana dīnha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0