आन उपाय मोहि नहिं सूझा । को जिय कै रघुबर बिनु बूझा ॥
एकहिं आँक इहइ मन माहीं । प्रातकाल चलिहउँ प्रभु पाहीं ॥
āna upāya mohi nahiṃ sūjhā | ko jiya kai raghubara binu būjhā ||
ekahiṃ ām̐ka ihai mana māhīṃ | prātakāla calihaum̐ prabhu pāhīṃ ||
5 श्लोक · 183 में से 326
भरत कहते हैं, मुझे कोई दूसरा उपाय नहीं सूझता। मन में एक ही निश्चय है, प्रातःकाल प्रभु के पास चलूँगा। यद्यपि मैं बुरा और अपराधी हूँ और सारा उपद्रव मेरे कारण हुआ, फिर भी मुझे शरण में सामने देखकर वे सब क्षमा करके विशेष कृपा करेंगे। रघुराज शील, संकोच और सरल स्वभाव वाले हैं, कृपा और स्नेह के धाम हैं। श्रीराम ने शत्रु का भी बुरा नहीं किया, मैं तो उनका बालक और सेवक हूँ, चाहे टेढ़ा ही सही। आप पंच इसे मेरा भला मानकर आज्ञा और आशीर्वाद दीजिए, जिससे मेरी विनती सुनकर और मुझे अपना जन जानकर श्रीराम राजधानी लौट आएँ। यद्यपि मेरा जन्म कुमाता से है और मैं सदा दोषी हूँ, मुझे भरोसा है कि रघुवीर अपना जानकर मुझे नहीं त्यागेंगे।
आन उपाय मोहि नहिं सूझा । को जिय कै रघुबर बिनु बूझा ॥
एकहिं आँक इहइ मन माहीं । प्रातकाल चलिहउँ प्रभु पाहीं ॥
āna upāya mohi nahiṃ sūjhā | ko jiya kai raghubara binu būjhā ||
ekahiṃ ām̐ka ihai mana māhīṃ | prātakāla calihaum̐ prabhu pāhīṃ ||
जद्यपि मैं अनभल अपराधी । भइ मोहि कारन सकल उपाधी ॥
तदपि सरन सनमुख मोहि देखी । छमि सब करिहहिं कृपा बिसेखी ॥
jadyapi maiṃ anabhala aparādhī | bhai mohi kārana sakala upādhī ||
tadapi sarana sanamukha mohi dekhī | chami saba karihahiṃ kṛpā bisekhī ||
सील सकुच सुठि सरल सुभाऊ । कृपा-सनेह-सदन रघुराऊ ॥
अरिहुक अनभल कीन्ह न रामा । मैं सिसु सेवक जद्यपि बामा ॥
sīla sakuca suṭhi sarala subhāū | kṛpā-saneha-sadana raghurāū ||
arihuka anabhala kīnha na rāmā | maiṃ sisu sevaka jadyapi bāmā ||
तुम्ह पै पाँच मोर भल मानी । आयसु आसिष देहु सुबानी ॥
जेहिं सुनि बिनय मोहि जनु जानी । आवहिं बहुरि राम रजधानी ॥
tumha pai pām̐ca mora bhala mānī | āyasu āsiṣa dehu subānī ||
jehiṃ suni binaya mohi janu jānī | āvahiṃ bahuri rāma rajadhānī ||
जद्यपि जनम कुमातु तेँ, मैं सठु सदा सदोस ।
आपन जानि न त्यागिहहिं, मोहि रघुबीर भरोस ॥
jadyapi janama kumātu tem̐, maiṃ saṭhu sadā sadosa |
āpana jāni na tyāgihahiṃ, mohi raghubīra bharosa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0