गुरु बिबेक सागर जग जाना । जिन्हहि बिस्व कर बदर समाना ॥
मो कहँ तिलक साज सज सोऊ । भये विधि बिमुख बिमुख सब कोऊ ॥
guru bibeka sāgara jaga jānā | jinhahi bisva kara badara samānā ||
mo kaham̐ tilaka sāja saja soū | bhaye vidhi bimukha bimukha saba koū ||
5 श्लोक · 182 में से 326
भरत आगे कहते हैं, गुरु ज्ञान के सागर हैं, जिनके लिए संसार हथेली पर रखे बेर के समान है, वे भी मेरे तिलक का साज सजा रहे हैं। राम और सीता को छोड़कर जगत में कोई नहीं कहेगा कि इसमें मेरा मत नहीं था। वह मैं सुख मानकर सुनूँगा और सहूँगा, जहाँ पानी होता है वहाँ अन्त में कीचड़ होता ही है। हृदय में एक ही असह्य दावानल है कि मेरे कारण सीता और राम दुःखी हुए। जीवन का लाभ तो लक्ष्मण ने पाया, सब छोड़कर राम के चरणों में मन लगाया। मेरा जन्म तो रघुवर को वन भेजने के लिए हुआ। सबको सिर नवाकर अपनी दारुण दीनता कहता हूँ, रघुनाथ के चरण देखे बिना हृदय की जलन नहीं जाएगी।
गुरु बिबेक सागर जग जाना । जिन्हहि बिस्व कर बदर समाना ॥
मो कहँ तिलक साज सज सोऊ । भये विधि बिमुख बिमुख सब कोऊ ॥
guru bibeka sāgara jaga jānā | jinhahi bisva kara badara samānā ||
mo kaham̐ tilaka sāja saja soū | bhaye vidhi bimukha bimukha saba koū ||
परिहरि राम सीय जग माहीं । कोउ न कहिहि मोर मत नाहीँ ॥
सो मैं सुनब सहब सुख मानी । अंतहुँ कीच तहाँ जहँ पानी ॥
parihari rāma sīya jaga māhīṃ | kou na kahihi mora mata nāhīm̐ ||
so maiṃ sunaba sahaba sukha mānī | aṃtahum̐ kīca tahām̐ jaham̐ pānī ||
हर न मोहि जग कहिहि कि पोचू । परलोकहु कर नाहि न सोचू ॥
एका उर बस दुसह दवारी । मोहि लगि भे सिय राम दुखारी ॥
hara na mohi jaga kahihi ki pocū | paralokahu kara nāhi na socū ||
ekā ura basa dusaha davārī | mohi lagi bhe siya rāma dukhārī ||
जीवन लाहु लखन भल पावा । सब तजि राम-चरन मन लावा ॥
भार जनम रघुबर बन लागी । झूठ काह पछिताउँ अभागी ॥
jīvana lāhu lakhana bhala pāvā | saba taji rāma-carana mana lāvā ||
bhāra janama raghubara bana lāgī | jhūṭha kāha pachitāum̐ abhāgī ||
आपनि दारुन दीनता, कहउँ सबहि सिर नाइ ।
देखें बिनु रघुनाथ पद, जिय के जरनि न जाइ ॥
āpani dāruna dīnatā, kahaum̐ sabahi sira nāi |
dekheṃ binu raghunātha pada, jiya ke jarani na jāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0