कहउँ साँच सब सुनि पतिआहू । चाहिअ धरमसील नरनाहू ॥
मोहि राज हठि देइहहु जबहीं । रसा रसातल जाइहि तबहीं ॥
kahaum̐ sām̐ca saba suni patiāhū | cāhia dharamasīla naranāhū ||
mohi rāja haṭhi deihahu jabahīṃ | rasā rasātala jāihi tabahīṃ ||
5 श्लोक · 179 में से 326
भरत कहते हैं, मैं सच कहता हूँ, विश्वास कीजिए, राजा धर्मशील होना चाहिए। जिस दिन आप हठ करके मुझे राज देंगे, धरती रसातल में चली जाएगी। मेरे समान पाप का घर कौन है, जिसके कारण सीता और राम को वनवास हुआ? राजा ने राम को वन दिया और बिछुड़ते ही स्वर्ग चले गए, और मैं, सब अनर्थों का कारण, बैठा सब सुन रहा हूँ। रघुवीर के बिना घर देखकर भी मेरे प्राण जगत का उपहास सहते हैं। राम पवित्र हैं और विषयों से रूखे, मैं भूमि और भोग का लोभी। मेरे हृदय ने कठोरता में वज्र को भी हरा दिया। कारण से कार्य कठिन होता है, हड्डी, वज्र और पत्थर से बना लोहा उनसे भी कठोर होता है।
कहउँ साँच सब सुनि पतिआहू । चाहिअ धरमसील नरनाहू ॥
मोहि राज हठि देइहहु जबहीं । रसा रसातल जाइहि तबहीं ॥
kahaum̐ sām̐ca saba suni patiāhū | cāhia dharamasīla naranāhū ||
mohi rāja haṭhi deihahu jabahīṃ | rasā rasātala jāihi tabahīṃ ||
मोहि समान को पाप निवासू । जेहि लगि सीय-राम-बनबासू ॥
रायँ राम कह कानन दीन्हा । बिछुरत गमन अमरपुर कीन्हा ॥
mohi samāna ko pāpa nivāsū | jehi lagi sīya-rāma-banabāsū ||
rāyam̐ rāma kaha kānana dīnhā | bichurata gamana amarapura kīnhā ||
मैं सठ सब अनरथ कर हेतू । बैठ बात सब सुनउँ सचेतू ॥
बिनु रघुबीर बिलोकि अबासू । रहे प्रान सहि जग उपहासू ॥
maiṃ saṭha saba anaratha kara hetū | baiṭha bāta saba sunaum̐ sacetū ||
binu raghubīra biloki abāsū | rahe prāna sahi jaga upahāsū ||
राम पुनीत विषय-रस रूखे । लोलुप भूमि भोग के भूखे ॥
कहँ लगि-कहौं हृदय कठिनाई । निदरि कुलिस जेहिं लही बड़ाई ॥
rāma punīta viṣaya-rasa rūkhe | lolupa bhūmi bhoga ke bhūkhe ||
kaham̐ lagi-kahauṃ hṛdaya kaṭhināī | nidari kulisa jehiṃ lahī bar̤āī ||
कारन तें कारज कठिन, होइ दोस नहि मोर ।
कुलिस अस्थि तेँ उपल तेँ, लोह कराल कठोर ॥
kārana teṃ kāraja kaṭhina, hoi dosa nahi mora |
kulisa asthi tem̐ upala tem̐, loha karāla kaṭhora ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0