कैकेई-भव तनु अनुरागे । पाँवर प्रान अघाई अभागे ॥
जौं प्रिय-बिरहँ प्रान प्रिय लागे । देखब सुनब बहुत अब आगे ॥
kaikeī-bhava tanu anurāge | pām̐vara prāna aghāī abhāge ||
jauṃ priya-biraham̐ prāna priya lāge | dekhaba sunaba bahuta aba āge ||
5 श्लोक · 180 में से 326
भरत कहते हैं, कैकेयी से जन्मे शरीर से चिपके ये नीच प्राण तृप्त हैं। जब प्रिय के विरह में भी प्राण प्रिय लगते हैं, तो आगे अभी बहुत कुछ देखना है। कैकेयी ने लक्ष्मण, राम और सीता को वन दिया, पति को स्वर्ग भेजकर उनका हित किया, स्वयं वैधव्य और अपयश लिया और प्रजा को शोक दिया। मुझे सुख, सुयश और सुराज दिया, कैकेयी ने सबका काम कर दिया। इससे अच्छा मेरे लिए क्या होगा, उस पर आप राजतिलक देने को कहते हैं। कैकेयी के पेट से जन्म लेकर मेरे लिए कुछ अनुचित नहीं। विधाता ने मेरी बात बना ही दी है, आप पंच क्यों सहायता करते हैं? जिसे ग्रह लगा हो, फिर वायु रोग हो, फिर बिच्छू डँसे, उसे मदिरा पिलाना कैसा उपचार है?
कैकेई-भव तनु अनुरागे । पाँवर प्रान अघाई अभागे ॥
जौं प्रिय-बिरहँ प्रान प्रिय लागे । देखब सुनब बहुत अब आगे ॥
kaikeī-bhava tanu anurāge | pām̐vara prāna aghāī abhāge ||
jauṃ priya-biraham̐ prāna priya lāge | dekhaba sunaba bahuta aba āge ||
लखन-राम सिय कह बन दीन्हा । पठइ अमरपुर पति हित कीन्हा ॥
लीन्ह बिधवपन अपजस आपू । दीन्हेउ प्रजहि सोक सन्तापू ॥
lakhana-rāma siya kaha bana dīnhā | paṭhai amarapura pati hita kīnhā ||
līnha bidhavapana apajasa āpū | dīnheu prajahi soka santāpū ||
मोहि दीन्ह सुख सुजस सुराजू । कीन्ह कैकेईं सब कर काजू ॥
एहि तेँ मोर काह अब नीका । तेहि पर देन कहहु तुम्ह टीका ॥
mohi dīnha sukha sujasa surājū | kīnha kaikeīṃ saba kara kājū ||
ehi tem̐ mora kāha aba nīkā | tehi para dena kahahu tumha ṭīkā ||
कैकइ जठर जनमि जग माहीं । यह मोहि कहँ कछु अनुचित नाहीं ॥
मोरि बात सब बिधिहिं बनाई । प्रजा पाँच कत करहु सहाई ॥
kaikai jaṭhara janami jaga māhīṃ | yaha mohi kaham̐ kachu anucita nāhīṃ ||
mori bāta saba bidhihiṃ banāī | prajā pām̐ca kata karahu sahāī ||
ग्रह ग्रहीत पुनि बात बस, तेहि पुनि बीछी मार ।
ताहि पिआइअ बारुनी, कहहु कवन उपचार ॥
graha grahīta puni bāta basa, tehi puni bīchī māra |
tāhi piāia bārunī, kahahu kavana upacāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0