अयोध्याकाण्ड

अध्याय 158: भरत का शोकग्रस्त नगर में प्रवेश

5 श्लोक · 158 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत का शोकग्रस्त नगर में प्रवेश

भरत पवन के वेग से घोड़े हाँकते हुए नदियाँ, पर्वत और बीहड़ वन लाँघते चले। मन करता है उड़कर पहुँच जाऊँ; एक पल वर्ष के समान बीतता है। नगर के पास पहुँचते और प्रवेश करते समय अपशकुन होने लगे: कौए बुरी जगहों पर कर्कश बोलते हैं, गधे और सियार उलटे स्वर में बोलते हैं, जिन्हें सुनकर भरत के मन में शूल उठता है। सरोवर, वन और बाग श्रीहीन हैं। पशु पक्षी, घोड़े और हाथी राम वियोग के रोग से बेहाल हैं। नगर के स्त्री पुरुष अत्यन्त दुखी हैं, मानो सबने अपनी सारी सम्पत्ति हार दी हो। दोहे में पुरवासी मिलते हैं पर कुछ कहते नहीं, चुपचाप जुहार करके चले जाते हैं; मन में भय और विषाद के कारण भरत की कुशल भी नहीं पूछ पाते।

158.1

चले समीर-बेग हय हाँके । नाघत सरित सैल बन बाँके ॥
हृदयँ सोच बड़ कछु न सोहाई । अस जानहिं जियँ जाउँ उड़ाई ॥

cale samīra-bega haya hām̐ke | nāghata sarita saila bana bām̐ke ||
hṛdayam̐ soca bar̤a kachu na sohāī | asa jānahiṃ jiyam̐ jāum̐ ur̤āī ||

158.2

एक निमेष बरष सम जाई । एहि बिधि भरत नगर निअराई ॥
असगुन होहिँ नगर पैठारा । रटहिं कुभाँति कुखेत करारा ॥

eka nimeṣa baraṣa sama jāī | ehi bidhi bharata nagara niarāī ||
asaguna hohim̐ nagara paiṭhārā | raṭahiṃ kubhām̐ti kukheta karārā ||

158.3

खर सिआर बोलहिँ प्रतिकूला । सुनि सुनि होइ भरत मन सूला ॥
श्रीहत सर सरिता बन बागा । नगर बिसेषि भयावन लागा ॥

khara siāra bolahim̐ pratikūlā | suni suni hoi bharata mana sūlā ||
śrīhata sara saritā bana bāgā | nagara biseṣi bhayāvana lāgā ||

158.4

खग मृग हय गय जाहिं न जोए । राम-बियोग-कुरोग बिगोए ॥
नगर नारि नर निपट दुखारी । मनहुँ सबन्हि सब सम्पति हारी ॥

khaga mṛga haya gaya jāhiṃ na joe | rāma-biyoga-kuroga bigoe ||
nagara nāri nara nipaṭa dukhārī | manahum̐ sabanhi saba sampati hārī ||

दो॰ 158दोहा

पुरजन मिलिहिं न कहहिँ कछु, गँवहिँ जोहारहिं जाहिँ ।
भरत कुसल पूँछि न सकहिँ, भय बिषाद मन माहिँ ॥

purajana milihiṃ na kahahim̐ kachu, gam̐vahim̐ johārahiṃ jāhim̐ |
bharata kusala pūm̐chi na sakahim̐, bhaya biṣāda mana māhim̐ ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0