हाट बाट नहिं जाइ निहारी । जनु पुर दहँ दिसि लागि दवारी ॥
आवत सुत सुनि कैकयनंदिनि । हरषी रबिकुल जलरूह चन्दिनि ॥
hāṭa bāṭa nahiṃ jāi nihārī | janu pura daham̐ disi lāgi davārī ||
āvata suta suni kaikayanaṃdini | haraṣī rabikula jalarūha candini ||
5 श्लोक · 159 में से 326
बाजार और मार्ग ऐसे लगते हैं मानो नगर में दावानल लगा हो। पुत्र का आना सुनकर सूर्यकुल रूपी कमल के लिए चाँदनी रात बनी कैकेयी हर्षित हुई। आरती सजाकर वह दौड़ी और द्वार पर मिलकर उसे भीतर ले आई। भरत ने परिवार को ऐसा दुखी देखा मानो कमलवन को पाला मार गया हो, और कैकेयी ऐसी हर्षित है मानो भीलनी वन में आग लगाकर प्रसन्न हो। वह नैहर की कुशल पूछती है; भरत कुशल बताकर पूछते हैं: कहो, पिताजी कहाँ हैं, सब माताएँ कहाँ हैं, सीता, राम और प्रिय भाई लक्ष्मण कहाँ हैं। दोहे में पुत्र के स्नेहभरे वचन सुनकर पापिनी ने कपट के आँसू भरकर ऐसे वचन कहे जो भरत के कानों और मन में शूल के समान लगे।
हाट बाट नहिं जाइ निहारी । जनु पुर दहँ दिसि लागि दवारी ॥
आवत सुत सुनि कैकयनंदिनि । हरषी रबिकुल जलरूह चन्दिनि ॥
hāṭa bāṭa nahiṃ jāi nihārī | janu pura daham̐ disi lāgi davārī ||
āvata suta suni kaikayanaṃdini | haraṣī rabikula jalarūha candini ||
सजि आरती मुदित उठि धाई । द्वारेहिं भेंटि भवन लेइ आई ॥
भरत दुखित परिवार निहारा । मानहुँ तुहिन बन ज-बन मारा ॥
saji āratī mudita uṭhi dhāī | dvārehiṃ bheṃṭi bhavana lei āī ||
bharata dukhita parivāra nihārā | mānahum̐ tuhina bana ja-bana mārā ||
कैकेई हरषित एहि भाँती । मनहुँ मुदित दव लाइ किराती ॥
सुतहि ससोच देखि मन मारें । पूँछति नैहर कुसल हमारें ॥
kaikeī haraṣita ehi bhām̐tī | manahum̐ mudita dava lāi kirātī ||
sutahi sasoca dekhi mana māreṃ | pūm̐chati naihara kusala hamāreṃ ||
सकल कुसल कहि भरत सुनाई । पूछी निज-कुल कुसल भलाई ॥
कहु कहँ तात कहाँ सब माता । कहुँ सिय-राम-लखन प्रिय भ्राता ॥
sakala kusala kahi bharata sunāī | pūchī nija-kula kusala bhalāī ||
kahu kaham̐ tāta kahām̐ saba mātā | kahum̐ siya-rāma-lakhana priya bhrātā ||
सुनि सुत-बचन सनेहमय, कपट नीर भरि नयन ।
भरत श्रवन-मन-सूल-सम, पापिनि बोली बैन ॥
suni suta-bacana sanehamaya, kapaṭa nīra bhari nayana |
bharata śravana-mana-sūla-sama, pāpini bolī baina ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0