जिअन मरन फल दसरथ पावा । अंड अनेक अमल जस छावा ॥
जियत राम-बिधु-बदन निहारा । राम-बिरह करि मरन सँवारा ॥
jiana marana phala dasaratha pāvā | aṃḍa aneka amala jasa chāvā ||
jiyata rāma-bidhu-badana nihārā | rāma-biraha kari marana sam̐vārā ||
5 श्लोक · 156 में से 326
दशरथ ने जीने और मरने दोनों का फल पाया; उनका निर्मल यश अनेक ब्रह्माण्डों में छा गया। जीते जी उन्होंने राम का चन्द्रमुख देखा, और राम के विरह में मरकर अपनी मृत्यु को सँवार लिया। सब रानियाँ उनके रूप, शील, बल और तेज का बखान करती हुई रोती हैं और बार बार धरती पर गिरती हैं। दास और दासियाँ व्याकुल होकर बिलखते हैं, घर घर पुरवासी रोते हैं कि आज सूर्यकुल का सूर्य, धर्म की सीमा, गुण और रूप का भण्डार अस्त हो गया। सब कैकेयी को गालियाँ देते हैं, जिसने जगत को नेत्रहीन कर दिया। इस प्रकार विलाप करते रात बीती और सब ज्ञानी महामुनि आए। तब वसिष्ठ मुनि ने समय के अनुसार अनेक प्राचीन वृत्तान्त सुनाकर अपने ज्ञान के प्रकाश से सबका शोक दूर किया।
जिअन मरन फल दसरथ पावा । अंड अनेक अमल जस छावा ॥
जियत राम-बिधु-बदन निहारा । राम-बिरह करि मरन सँवारा ॥
jiana marana phala dasaratha pāvā | aṃḍa aneka amala jasa chāvā ||
jiyata rāma-bidhu-badana nihārā | rāma-biraha kari marana sam̐vārā ||
सोक बिकल सब रोवहिँ रानी । रूप सील बल तेज बखानी ॥
करहिँ बिलाप अनेक प्रकारा । परहिँ भूमितल बारहिँ बारा ॥
soka bikala saba rovahim̐ rānī | rūpa sīla bala teja bakhānī ||
karahim̐ bilāpa aneka prakārā | parahim̐ bhūmitala bārahim̐ bārā ||
बिलपहिँ बिकल दास अरु दासी । घर घर रुदन करहिं पुरबासी ॥
अँथयउ आजु भानुकुल-भानू । धरम-अवधि गुन-रूप-निधानू ॥
bilapahim̐ bikala dāsa aru dāsī | ghara ghara rudana karahiṃ purabāsī ||
am̐thayau āju bhānukula-bhānū | dharama-avadhi guna-rūpa-nidhānū ||
गारीं सकल कैकइहि देहीं । नयन बिहीन कीन्ह जग जेहीं ॥
एहि बिधि बिलपत रैनि बिहानी । आये सकल महामुनि ज्ञानी ॥
gārīṃ sakala kaikaihi dehīṃ | nayana bihīna kīnha jaga jehīṃ ||
ehi bidhi bilapata raini bihānī | āye sakala mahāmuni jñānī ||
तब बसिष्ठ मुनि समय सम, कहि अनेक इतिहास ।
सोक नेवारेउ, सबहि कर, निज विज्ञान प्रकास ॥
taba basiṣṭha muni samaya sama, kahi aneka itihāsa |
soka nevāreu, sabahi kara, nija vijñāna prakāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0