अयोध्याकाण्ड

अध्याय 152: भरत के लिए सन्देश, सीता मौन हुईं

5 श्लोक · 152 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत के लिए सन्देश, सीता मौन हुईं

सुमन्त्र श्रीराम का सन्देश आगे सुनाते हैं: सब पुरजनों और परिजनों से विनती करके कहना कि जिससे राजा सुखी रहें, वही मेरा हितैषी है। भरत आएँ तो उनसे कहना कि राजपद पाकर नीति न छोड़ें; कर्म, मन और वचन से प्रजा का पालन करें, सब माताओं को समान जानकर सेवा करें, भाईचारा निभाएँ और माता पिता तथा स्वजनों की सेवा करें; और राजा को ऐसे रखें कि वे कभी मेरा सोच न करें। लक्ष्मण ने कुछ कठोर वचन कहे थे; राम ने उन्हें रोका और बार बार अपनी शपथ दिलाकर मुझसे विनती की कि लक्ष्मण का लड़कपन पिताजी से न कहना। दोहे में सीता ने प्रणाम कहकर कुछ कहना चाहा, पर स्नेह से शिथिल हो गईं; वाणी थम गई, नेत्र भर आए और शरीर पुलकित हो उठा।

152.1

पुरजन परिजन सकल निहोरी । तात सुनाएहु बिनती मोरी ॥
सोइ सब भाँति मोर हितकारी । जा तें रह नरनाह सुखारी ॥

purajana parijana sakala nihorī | tāta sunāehu binatī morī ||
soi saba bhām̐ti mora hitakārī | jā teṃ raha naranāha sukhārī ||

152.2

कहब सँदेस भरत के आये । नीति न तजिय राज-पद पाये ॥
पालेहु प्रजहि करम मन बानी । सेएहु मातु सकल सम जानी ॥

kahaba sam̐desa bharata ke āye | nīti na tajiya rāja-pada pāye ||
pālehu prajahi karama mana bānī | seehu mātu sakala sama jānī ||

152.3

अउर निबाहेहु भायप आई । करि पितु-मातु सुजन, सेवकाई ॥
तात भाँति, तेहि राखब राऊ । सोच मोर जेहिं करइ न काऊ ॥

aura nibāhehu bhāyapa āī | kari pitu-mātu sujana, sevakāī ||
tāta bhām̐ti, tehi rākhaba rāū | soca mora jehiṃ karai na kāū ||

152.4

लखन कहे कछु बचन कठोरा । बरजि राम पुनि मोहि निहोरा ॥
बार बार निज सपथ देवाई । कहबि न तात लखन-लरिकाई ॥

lakhana kahe kachu bacana kaṭhorā | baraji rāma puni mohi nihorā ||
bāra bāra nija sapatha devāī | kahabi na tāta lakhana-larikāī ||

दो॰ 152दोहा

कहि प्रनाम कछु कहन लिय, सिय भइ सिथिल सनेह ।
थकित-बचन लोचन-सजल, पुलक-पल्लवित-देह ॥

kahi pranāma kachu kahana liya, siya bhai sithila saneha |
thakita-bacana locana-sajala, pulaka-pallavita-deha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0