केवट कीन्ह बहुत सेवकाई । सो जामिनि सिंगरौर गवाँई ॥
होत प्रात बट छीरु मगावा । जटा-मुकुट निज सीस बनावा ॥
kevaṭa kīnha bahuta sevakāī | so jāmini siṃgaraura gavām̐ī ||
hota prāta baṭa chīru magāvā | jaṭā-mukuṭa nija sīsa banāvā ||
6 श्लोक · 151 में से 326
सुमन्त्र आगे कहते हैं, केवट ने सेवा की और वह रात शृंगवेरपुर में बीती। सवेरे श्रीराम ने बरगद का दूध मँगाकर जटाओं का मुकुट बनाया। सखा ने नाव मँगाई; प्रभु ने सीता को चढ़ाकर स्वयं चढ़े, और धनुष बाण लिए लक्ष्मण आज्ञा पाकर चढ़े। मुझे व्याकुल देखकर रघुवीर ने धीरज से कहा: पिताजी से मेरा प्रणाम कहना, बार बार चरण पकड़ना और विनती करना कि मेरी चिन्ता न करें; उनकी कृपा और पुण्य से वन का मार्ग मंगलमय होगा। छन्द में वे कहते हैं, आपके अनुग्रह से वन में सुख पाऊँगा और आज्ञा पूरी करके चरणों के दर्शन को लौटूँगा; सब माताओं को सन्तोष देना और कोसलपति को कुशल रखना। सोरठे में गुरु से कहने को कहा कि वे ऐसा उपदेश दें जिससे राजा मेरा सोच न करें।
केवट कीन्ह बहुत सेवकाई । सो जामिनि सिंगरौर गवाँई ॥
होत प्रात बट छीरु मगावा । जटा-मुकुट निज सीस बनावा ॥
kevaṭa kīnha bahuta sevakāī | so jāmini siṃgaraura gavām̐ī ||
hota prāta baṭa chīru magāvā | jaṭā-mukuṭa nija sīsa banāvā ||
राम सखाँ तब नाव मगाई । प्रिया चढ़ाई चढ़े रघुराई ॥
लखन बान-धनु धरे बनाई । आपु चढ़े प्रभु आयसु पाई ॥
rāma sakhām̐ taba nāva magāī | priyā car̤hāī car̤he raghurāī ||
lakhana bāna-dhanu dhare banāī | āpu car̤he prabhu āyasu pāī ||
बिकल बिलोकि मोहि रघुबीरा । बोले मधुर बचन धरि धीरा ॥
तात प्रनाम तात सन कहेहु । बार बार पद-पङ्कज गहेहू ॥
bikala biloki mohi raghubīrā | bole madhura bacana dhari dhīrā ||
tāta pranāma tāta sana kahehu | bāra bāra pada-paṅkaja gahehū ||
करवि पायँ परि बिनय बहोरी । तात करिय जनि चिन्ता मोरी ॥
बन-मग मङ्गल-कुसल हमारें । कृपा-अनुग्रह पुन्य तुम्हारें ॥
karavi pāyam̐ pari binaya bahorī | tāta kariya jani cintā morī ||
bana-maga maṅgala-kusala hamāreṃ | kṛpā-anugraha punya tumhāreṃ ||
तुम्हरे अनुग्रह तात कानन, जात सब सुखु पाइहौं ।
प्रतिपालि आयसु कुसल देखन, पाय पुनि फिरि आइहौं ॥
जननीं सकल परितोषि परि परि, पायँ करि बिनती घनी ।
तुलसी करेहु सोइ जतन जेहिं कुसली रहहिँ कोसल-धनी ॥
tumhare anugraha tāta kānana, jāta saba sukhu pāihauṃ |
pratipāli āyasu kusala dekhana, pāya puni phiri āihauṃ ||
jananīṃ sakala paritoṣi pari pari, pāyam̐ kari binatī ghanī |
tulasī karehu soi jatana jehiṃ kusalī rahahim̐ kosala-dhanī ||
गुरु सन कहब सँदेस, बार बार पद पदुम गहि ।
करब सोइ उपदेस, जेहिं न सोच मोहि अवधपति ॥
guru sana kahaba sam̐desa, bāra bāra pada paduma gahi |
karaba soi upadesa, jehiṃ na soca mohi avadhapati ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0