अयोध्याकाण्ड

अध्याय 146: सुमन्त्र क्या उत्तर देंगे

5 श्लोक · 146 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सुमन्त्र क्या उत्तर देंगे

सुमन्त्र का सोच चलता रहता है। दुखी माताएँ पूछेंगी, लक्ष्मण की माता पूछेंगी, तो मैं क्या सुखद सन्देश दूँगा। जब श्रीराम की माता बछड़े को याद करती गाय की भाँति दौड़ी आएँगी, तब यही उत्तर दूँगा कि राम, लक्ष्मण और वैदेही वन चले गए। अवध जाकर अब यही सुख लेना है। जब वह दुखी राजा पूछेंगे जिनका जीवन रघुनाथ के अधीन है, तब किस मुँह से कहूँगा कि राजकुमारों को पहुँचाकर कुशल से लौट आया। सन्देश सुनते ही राजा तिनके की भाँति शरीर छोड़ देंगे। दोहा कहता है कि प्रियतम जल के बिछुड़ने पर भी मेरा हृदय कीचड़ की तरह नहीं फटा; विधाता ने मुझे यातना भोगने के लिए ही यह शरीर दिया है।

146.1

पुछिहहिँ दीन दुखित सब माता । कहब काह मैं तिन्हहिँ बिधाता ॥
पूछिहि जबहिँ लखन महँतारी । कहिहउँ कवन सँदेस सुखारी ॥

puchihahim̐ dīna dukhita saba mātā | kahaba kāha maiṃ tinhahim̐ bidhātā ||
pūchihi jabahim̐ lakhana maham̐tārī | kahihaum̐ kavana sam̐desa sukhārī ||

146.2

राम-जननि जब आइहि धाई । सुमिरि बच्छ जिमि धेनु लवाई ॥
पूँछत उतरु देब मैं तेही । गे बनु राम-लखन-बैदेही ॥

rāma-janani jaba āihi dhāī | sumiri baccha jimi dhenu lavāī ||
pūm̐chata utaru deba maiṃ tehī | ge banu rāma-lakhana-baidehī ||

146.3

जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देवा । जाइ अवध अब यह सुख लेवा ॥
पूँछिहि जबहिँ राउ दुख दीना । जिवन जासु रघुनाथ अधीना ॥

joi pūm̐chihi tehi ūtaru devā | jāi avadha aba yaha sukha levā ||
pūm̐chihi jabahim̐ rāu dukha dīnā | jivana jāsu raghunātha adhīnā ||

146.4

देहउँ उतर कवन मुँह लाई । आयउँ कुसल कुअँर पहुँचाई ॥
सुनत लखन-सिय-राम सँदेसू । तृन जिमि तनु परिहरिहि नरेसू ॥

dehaum̐ utara kavana mum̐ha lāī | āyaum̐ kusala kuam̐ra pahum̐cāī ||
sunata lakhana-siya-rāma sam̐desū | tṛna jimi tanu pariharihi naresū ||

दो॰ 146दोहा

हृदय न बिदरेउ पङ्क जिमि, बिछुरत प्रीतम नीर ।
जानत हौँ मोहि दीन्ह विधि, यह जातना शरीर ॥

hṛdaya na bidareu paṅka jimi, bichurata prītama nīra |
jānata haum̐ mohi dīnha vidhi, yaha jātanā śarīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0