अयोध्याकाण्ड

अध्याय 140: वन में सीता का सुख

5 श्लोक · 140 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

वन में सीता का सुख

श्रीराम के संग सीता नगर, परिवार और घर भुलाकर सुख से रहती हैं। प्रियतम के चन्द्रमुख को चकोरी की भाँति निहारती हैं और उनका बढ़ता स्नेह देखकर दिन की चकवी जैसी हर्षित रहती हैं। राम के चरणों में अनुरक्त सीता को वन हजार अवधों से भी प्रिय लगता है। पर्णकुटी प्रिय है, हिरन और पक्षी परिवार हैं, मुनि और मुनिपत्नियाँ सास ससुर के समान हैं, कन्द मूल अमृत हैं, और स्वामी के साथ घास की साथरी कामदेव की सेज से भी सुखद है। जिनकी दृष्टि से जीव लोकपाल बनते हैं, उन्हें भोग क्या मोहेंगे। दोहा कहता है कि राम का स्मरण करके भक्त विषयभोग तिनके की भाँति छोड़ते हैं; जगज्जननी सीता के लिए इसमें क्या आश्चर्य।

140.1

राम सङ्ग सिय रहति सुखारी । पुर-परिजन-गृह-सुरति बिसारी ॥
छिनु छिनु पिय बिधु-बदन निहारी । प्रमुदित मनहुँ चकोरकुमारी ॥

rāma saṅga siya rahati sukhārī | pura-parijana-gṛha-surati bisārī ||
chinu chinu piya bidhu-badana nihārī | pramudita manahum̐ cakorakumārī ||

140.2

नाह नेह नित बढ़त बिलोकी । हरषित रहति दिवस जिमि कोकी ॥
सिय मन राम-चरन अनुरागा । अवध-सहस-सम बन प्रिय लागा ॥

nāha neha nita bar̤hata bilokī | haraṣita rahati divasa jimi kokī ||
siya mana rāma-carana anurāgā | avadha-sahasa-sama bana priya lāgā ||

140.3

परन-कुटी प्रिय प्रियतम सङ्गा । प्रिय परिवार कुरङ्ग, बिहङ्गा ॥
सासु-ससुर-सममुनि-तिय मुनिबर । असन अमिय सम कन्द मूल फर ॥

parana-kuṭī priya priyatama saṅgā | priya parivāra kuraṅga, bihaṅgā ||
sāsu-sasura-samamuni-tiya munibara | asana amiya sama kanda mūla phara ||

140.4

नाथ साथ साँथरी सुहाई । मयन-सयन-सय-सम सुखदाई ॥
लोकप होहिँ बिलोकत जासू । तेहि कि मोहि सक विषय-बिलासू ॥

nātha sātha sām̐tharī suhāī | mayana-sayana-saya-sama sukhadāī ||
lokapa hohim̐ bilokata jāsū | tehi ki mohi saka viṣaya-bilāsū ||

दो॰ 140दोहा

सुमिरत रामहि तजहिँ जन, तन सम विषय-बिलासु ।
राम-प्रिया जग-जननि-सिय, कछु न आचरज तासु ॥

sumirata rāmahi tajahim̐ jana, tana sama viṣaya-bilāsu |
rāma-priyā jaga-janani-siya, kachu na ācaraja tāsu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0