कत सिख देइ हमहिँ कोउ माई । गाल करब केहि कर बल पाई ॥
रामहिँ छाड़ि कुसल केहि आजू । जेहि जनेस देइ जुबराजू ॥
kata sikha dei hamahim̐ kou māī | gāla karaba kehi kara bala pāī ||
rāmahim̐ chār̤i kusala kehi ājū | jehi janesa dei jubarājū ||
5 श्लोक · 14 में से 326
मन्थरा कड़वाहट से बोली, कोई हमें क्यों सीख देगा, और किसके बल पर मैं गाल बजाऊँगी? आज श्रीराम को छोड़ किसकी कुशल है, जिन्हें राजा युवराज बना रहे हैं। कौसल्या पर विधाता दाहिना हुआ है, उनका गर्व समाता नहीं। जाकर वह शोभा देखो जिसे देखकर सवेरे मेरा मन क्षुब्ध हुआ। पुत्र परदेस में है और तुम्हें सोच नहीं, समझती हो कि स्वामी तुम्हारे वश में हैं। तुम्हें नींद और कोमल सेज प्यारी है, राजा की कपट भरी चतुराई नहीं दिखती। उसका मन मैला जानकर रानी झिड़ककर बोलीं, चुप रह, घरफोड़ी, फिर ऐसा कहा तो जीभ खिंचवा लूँगी। फिर भी वे मुस्कुराकर बोलीं कि काने, लँगड़े और कुबड़े कुटिल माने जाते हैं, उनमें स्त्री और फिर दासी विशेष।
कत सिख देइ हमहिँ कोउ माई । गाल करब केहि कर बल पाई ॥
रामहिँ छाड़ि कुसल केहि आजू । जेहि जनेस देइ जुबराजू ॥
kata sikha dei hamahim̐ kou māī | gāla karaba kehi kara bala pāī ||
rāmahim̐ chār̤i kusala kehi ājū | jehi janesa dei jubarājū ||
भयउ कौसिलहि बिधि अति दाहिन । देखत गरब रहत उर नाहिन ॥
देखेहु कस न जाइ सब सोभा । जो अवलोकि भोर मन छोभा ॥
bhayau kausilahi bidhi ati dāhina | dekhata garaba rahata ura nāhina ||
dekhehu kasa na jāi saba sobhā | jo avaloki bhora mana chobhā ||
पूत बिदेस न सोच तुम्हारें । जानति हहु बस नाह हमारें ॥
नींद बहुत प्रिय सेज तुराई । लखहु न भूप कपट चतुराई ॥
pūta bidesa na soca tumhāreṃ | jānati hahu basa nāha hamāreṃ ||
nīṃda bahuta priya seja turāī | lakhahu na bhūpa kapaṭa caturāī ||
सुनि प्रिय बचन मलिन मनु जानी । झुकी रानि अब रहु अरगानी ॥
पुनि अस कबहुँ कहसि घरफोरी । तब धरि जीभ कढ़ावउँ तोरी ॥
suni priya bacana malina manu jānī | jhukī rāni aba rahu aragānī ||
puni asa kabahum̐ kahasi gharaphorī | taba dhari jībha kar̤hāvaum̐ torī ||
काने खोरे कूबरे, कुटिल कुचाली जानि ।
तिय बिसेष पुनि चेरि कहि, भरत-मातु मुसुकानि ॥
kāne khore kūbare, kuṭila kucālī jāni |
tiya biseṣa puni ceri kahi, bharata-mātu musukāni ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0