अयोध्याकाण्ड

अध्याय 13: उत्सव देखकर मन्थरा का जलना

5 श्लोक · 13 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

उत्सव देखकर मन्थरा का जलना

मन्थरा ने नगर की सजावट देखी और मंगल बाजे सुने। लोगों से पूछा कि कैसा उत्सव है, और श्रीराम के तिलक की बात सुनकर उसका हृदय जल उठा। वह कुबुद्धि सोचने लगी कि रात भर में यह काम कैसे बिगड़े, जैसे कुटिल भीलनी मधु का छत्ता देखकर घात लगाती है। वह बिलखती हुई भरत की माता के पास गई। रानी ने हँसकर पूछा कि उदास क्यों है। वह कुछ नहीं बोली, बस लम्बी साँस लेकर आँसू ढालती रही। रानी फिर हँसकर बोलीं, तेरे बड़े गाल हैं, लगता है लक्ष्मण ने तुझे सीख दी है। तब भी वह पापिनी काली नागिन जैसी साँस छोड़ती रही। डरकर रानी ने पूछा, श्रीराम, राजा, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न कुशल तो हैं? यह सुनकर कुबड़ी के हृदय में पीड़ा हुई।

13.1

दीख मन्थरा नगर बनावा । मञ्जुल मङ्गल बाज बधावा ॥
पूछेसि लोगन्ह काह उछाहू । राम-तिलक सुनि भा उर दाहू ॥

dīkha mantharā nagara banāvā | mañjula maṅgala bāja badhāvā ||
pūchesi loganha kāha uchāhū | rāma-tilaka suni bhā ura dāhū ||

13.2

करइ बिचार कुबुद्धि कुजाती । होइ अकाज कवनि बिधि राता ॥
देखि लागि मधु कुटिल किराती । जिमि गवँ तकइ लेउँ केहि भाँती ॥

karai bicāra kubuddhi kujātī | hoi akāja kavani bidhi rātā ||
dekhi lāgi madhu kuṭila kirātī | jimi gavam̐ takai leum̐ kehi bhām̐tī ||

13.3

भरत-मातु पहिँ गइ बिलखानी । का अनमनि हसि कह हँसि रानी ॥
उतरु देइ न लेइ उसासू । नारि चरित करि ढारइ आँसू ॥

bharata-mātu pahim̐ gai bilakhānī | kā anamani hasi kaha ham̐si rānī ||
utaru dei na lei usāsū | nāri carita kari ḍhārai ām̐sū ||

13.4

हँसि कह रानि गाल बड़ तोरें । दीन्ह लखन सिख अस मन मोरें ॥
तबहुँ न बोल चेरि बड़ि पापिनि । छाड़इ स्वास कारि जनु साँपिनि ॥

ham̐si kaha rāni gāla bar̤a toreṃ | dīnha lakhana sikha asa mana moreṃ ||
tabahum̐ na bola ceri bar̤i pāpini | chār̤ai svāsa kāri janu sām̐pini ||

दो॰ 13दोहा

सभय रानि कह कहसि किन, कुसल राम महिपाल ।
लखन भरत रिपुदमन सुनि, भा कुबरी उर साल ॥

sabhaya rāni kaha kahasi kina, kusala rāma mahipāla |
lakhana bharata ripudamana suni, bhā kubarī ura sāla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0