अयोध्याकाण्ड

अध्याय 15: कैकेयी का श्रीराम के प्रति स्नेह

5 श्लोक · 15 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

कैकेयी का श्रीराम के प्रति स्नेह

कैकेयी नरम होकर बोलीं, प्रियवादिनी, मैंने तो सीख दी है, सपने में भी तुझ पर क्रोध नहीं। जिस दिन तेरा कहा सच हो, वही शुभ दिन होगा। बड़ा भाई स्वामी और छोटे भाई सेवक, यह सूर्यवंश की सुन्दर रीति है। यदि सचमुच कल श्रीराम का तिलक है, तो सखी, मनचाहा माँग ले। श्रीराम को सब माताएँ कौसल्या के समान प्यारी हैं, और मुझ पर तो वे विशेष स्नेह करते हैं, मैंने परीक्षा करके देखा है। यदि विधाता फिर जन्म दे, तो श्रीराम और सीता मेरे पुत्र और पुत्रवधू हों। श्रीराम मुझे प्राणों से भी प्रिय हैं, उनके तिलक से तुझे क्षोभ क्यों? भरत की शपथ, कपट छोड़कर सच बता, हर्ष के समय विष क्यों घोल रही है।

15.1

प्रियबादिनि सिख दीन्हिउँ तोही । सपनेहुँ तो पर कोप न मोही ॥
सुदिन सुमङ्गल-दायक सोई । तोर कहा फुर जेहि दिन होई ॥

priyabādini sikha dīnhium̐ tohī | sapanehum̐ to para kopa na mohī ||
sudina sumaṅgala-dāyaka soī | tora kahā phura jehi dina hoī ||

15.2

जेठ स्वामि सेवक लघु भाई । यह दिनकर-कुल-रीति सुहाई ॥
राम-तिलक जौँ साँचेहुँ काली । देउँ माँगु मन-भावत आली ॥

jeṭha svāmi sevaka laghu bhāī | yaha dinakara-kula-rīti suhāī ||
rāma-tilaka jaum̐ sām̐cehum̐ kālī | deum̐ mām̐gu mana-bhāvata ālī ||

15.3

कौसल्या सम सब महँतारी । रामहिँ सहज सुभायँ पियारी ॥
मो पर करहिँ सनेह बिसेखी । मैँ करि प्रीति परीछा देखी ॥

kausalyā sama saba maham̐tārī | rāmahim̐ sahaja subhāyam̐ piyārī ||
mo para karahim̐ saneha bisekhī | maim̐ kari prīti parīchā dekhī ||

15.4

जौं बिधि जनम देइ करि छोहू । होहु राम-सिय पूत-पुतोहू ॥
प्रान तेँ अधिक राम प्रिय मोरें । तिन्ह कें तिलक छोभ कस तोरें ॥

jauṃ bidhi janama dei kari chohū | hohu rāma-siya pūta-putohū ||
prāna tem̐ adhika rāma priya moreṃ | tinha keṃ tilaka chobha kasa toreṃ ||

दो॰ 15दोहा

भरत सपथ तोहि साँच कहु, परिहरि कपट दुराउ ।
हरष समय बिसमउ करसि, कारन मोहि सुनाउ ॥

bharata sapatha tohi sām̐ca kahu, parihari kapaṭa durāu |
haraṣa samaya bisamau karasi, kārana mohi sunāu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0