अयोध्याकाण्ड

अध्याय 133: लक्ष्मण ने स्थान चुना, कुटियाँ बनीं

5 श्लोक · 133 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

लक्ष्मण ने स्थान चुना, कुटियाँ बनीं

श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि घाट अच्छा है, अब ठहरने का स्थान ढूँढो। लक्ष्मण ने नदी का ऊँचा उत्तरी कगार देखा जो धनुष की भाँति मुड़ा था। गोस्वामीजी उपमा रचते हैं: नदी प्रत्यंचा है, शम, दम और दान बाण हैं, कलियुग के पाप शिकार के पशु हैं, और चित्रकूट अचल शिकारी है जिसका वार कभी नहीं चूकता। स्थान देखकर श्रीराम सुखी हुए। प्रभु का मन यहाँ रम गया जानकर देवता विश्वकर्मा के साथ कोल और किरातों का वेष धरकर आए और पत्तों तथा घास की सुन्दर कुटियाँ बना दीं, एक छोटी और सुघड़, दूसरी बड़ी। दोहे में लक्ष्मण और जानकी सहित प्रभु उस निवास में ऐसे शोभित हैं मानो मुनिवेष में कामदेव रति और वसन्त के साथ बैठे हों।

133.1

रघुबर कहेउ लखन भल घाटू । करहु कतहुँ अब ठाहर ठाटू ॥
लखन दीख पय उतर करारा । चहुँ दिसि फिरेउ धनुष जिमि नारा ॥

raghubara kaheu lakhana bhala ghāṭū | karahu katahum̐ aba ṭhāhara ṭhāṭū ||
lakhana dīkha paya utara karārā | cahum̐ disi phireu dhanuṣa jimi nārā ||

133.2

नदी पनच सर सम दम दाना । सकल कलुष-कलि साउज नाना ॥
चित्रकूट जनु अचल अहेरी । चुकइ न घात मार मुठभेरी ॥

nadī panaca sara sama dama dānā | sakala kaluṣa-kali sāuja nānā ||
citrakūṭa janu acala aherī | cukai na ghāta māra muṭhabherī ||

133.3

अस कहि लखन ठाउँ देखरावा । थल बिलोकि रघुबर सुख पावा ॥
रमेउ राम मन देवन्ह जाना । चले सहित सुर थपति-प्रधाना ॥

asa kahi lakhana ṭhāum̐ dekharāvā | thala biloki raghubara sukha pāvā ||
rameu rāma mana devanha jānā | cale sahita sura thapati-pradhānā ||

133.4

कोल-किरात-बेष सब आये । रचे परन-तृन-सदन सुहाये ॥
बरनि न जाहिँ मज्जु दुइ साला । एक ललित लघु एक बिसाला ॥

kola-kirāta-beṣa saba āye | race parana-tṛna-sadana suhāye ||
barani na jāhim̐ majju dui sālā | eka lalita laghu eka bisālā ||

दो॰ 133दोहा

लखन जानकी सहित प्रभु, राजत रुचिर निकेत ।
सोह मदन मुनि बेष जनु, रति-रितुराज-समेत ॥

lakhana jānakī sahita prabhu, rājata rucira niketa |
soha madana muni beṣa janu, rati-riturāja-sameta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0