अयोध्याकाण्ड

अध्याय 134: देवताओं और मुनियों का श्रीराम से मिलन

5 श्लोक · 134 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

देवताओं और मुनियों का श्रीराम से मिलन

देवता, नाग, किन्नर और दिक्पाल उसी समय चित्रकूट आए। श्रीराम ने सबको प्रणाम किया और नेत्रों का लाभ पाकर देवता प्रसन्न हुए। फूल बरसाकर देवसमाज ने कहा, नाथ, आज हम सनाथ हो गए। उन्होंने विनती करके अपने असह्य दुःख सुनाए और हर्षित होकर अपने अपने लोक गए। रघुनन्दन चित्रकूट में आ बसे हैं, यह समाचार सुनकर मुनि आने लगे। मुनिवृन्द को आते देख रघुकुलचन्द्र ने दण्डवत किया। मुनि उन्हें हृदय से लगाते हैं और आशीर्वाद देते हैं, और सीता, लक्ष्मण तथा श्रीराम की छवि देखकर अपने सब साधन सफल मानते हैं। दोहे में प्रभु सबका यथायोग्य सम्मान करके उन्हें विदा करते हैं, और मुनि अपने आश्रमों में निश्चिन्त होकर योग, जप, यज्ञ और तप करने लगते हैं।

134.1

अमर नाग किन्नर दिसिपाला । चित्रकूट आये तेहि काला ॥
राम प्रनाम कीन्ह सब काहू । मुदित देव लहि लोचन लाहू ॥

amara nāga kinnara disipālā | citrakūṭa āye tehi kālā ||
rāma pranāma kīnha saba kāhū | mudita deva lahi locana lāhū ||

134.2

बरषि सुमन कह देव-समाजू । नाथ सनाथ भए हम आजू ॥
करि बिनती दुख दुसह सुनाये । हरषित निज निज सदन सिधाये ॥

baraṣi sumana kaha deva-samājū | nātha sanātha bhae hama ājū ||
kari binatī dukha dusaha sunāye | haraṣita nija nija sadana sidhāye ||

134.3

चित्रकूट रघुनन्दन छाये । समाचार सुनि सुनि मुनि आये ॥
आवत देखि मुदित मुनि-वृन्दा । कीन्ह दंडवत रघुकुल-चन्दा ॥

citrakūṭa raghunandana chāye | samācāra suni suni muni āye ||
āvata dekhi mudita muni-vṛndā | kīnha daṃḍavata raghukula-candā ||

134.4

मुनि रघुबरहि लाइ उर लेहीं । सुफल होन हित आसिष देहीं ॥
सिय-सौमित्र राम छबि देखहिं । साधन सकल सफल करि लेखहिं ॥

muni raghubarahi lāi ura lehīṃ | suphala hona hita āsiṣa dehīṃ ||
siya-saumitra rāma chabi dekhahiṃ | sādhana sakala saphala kari lekhahiṃ ||

दो॰ 134दोहा

जथाजोग सनमानि प्रभु, विदा किये मुनि-बृन्द ।
करहिँ जोग जप जाग तप, निज आश्रमन्हि सुछन्द ॥

jathājoga sanamāni prabhu, vidā kiye muni-bṛnda |
karahim̐ joga japa jāga tapa, nija āśramanhi suchanda ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0